हाउसिंग लोन के लिए एक हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए नैनीताल बैंक द्वाराहाट (अल्मोड़ा) के तत्कालीन बैंक मैनेजर चूड़ामणि राठौर को सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी पाते हुए तीन साल कैद एवं पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर दोषी का एक माह का अतिरिक्त कारावास काटना होगा।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक जगदीश सिंह ने 11 जनवरी वर्ष 2011 को नैनीताल बैंक द्वाराहाट अल्मोड़ा के शाखा प्रबंधक पर हाउसिंग लोन के लिए एक हजार रुपये रिश्वत मांगने की शिकायत की। सीबीआई देहरादून को की शिकायत में उन्होंने कहा कि उनका तीन लाख 80 हजार रुपये का लोन मंजूर हुआ था।
इसकी चार किश्तें भी जारी हो चुकी थी, लेकिन सात जनवरी वर्ष 2011 को उन्होंने बैंक प्रबंधक से अगली किश्तें जारी करने को कहा तो उनसे एक हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई। शिकायत के बाद सीबीआई की ओर से मामले की जांच कर आरोपी को 13 जनवरी को एक हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
नौ गवाह हुए पेश
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अनुज कुमार संगल की अदालत में हुई सुनवाई में सीबीआई की ओर से नौ गवाह पेश किए गए। लोक अभियोजक पंकज गुप्ता ने अदालत में कई साक्ष्य प्रस्तुत किए। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से मामले को झूठा करार दिया गया। अभियोजन और बचाव पक्ष को सुनने के बाद अदालत ने आरोप सही पाया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि भ्रष्ट आचरण का सामना आज आम जन को प्रतिदिन करना पड़ता है। मामले में किसी भी प्रकार की उदारता प्रत्येक दृष्टिकोण से घातक है। अदालत ने दोषी चूड़ामणि राठौर मूल निवासी बानखाना नीम की मठिया बरेली उत्तर प्रदेश को तीन साल कैद की सजा सुनाई।