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जीजा को थमाया सुसाइड नोट और मौत को लगाया गले

Mon, 18 Nov 2013 10:46 PM IST
अमर उजाला, हल्द्वानी
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‘इस जिंदगी से मेरा मन भर चुका है, ऊब चुका हूं मैं अब। थक गया हूं जिंदगी से। मेरे पापा ने न तो ठीक से पढ़ाया और न ही जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए मेरे लिए कुछ किया। वो दूसरों के बच्चों से ज्यादा प्यार करते हैं। मैं अब कैंसर और ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारी से तंग आ चुका हूं। इसलिए आत्महत्या कर रहा हूं।’ ये मार्मिक पंक्तियां उस सुसाइड नोट की हैं जो प्रतापगढ़ (इलाहाबाद) निवासी एक युवक ने लिखीं।
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नोट अपने जीजा को देकर उसने सोमवार दोपहर अचानक गौला बैराज में छलांग लगा दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है।

लम्बे समय से था नौकरी की तलाश में
काठगोदाम पुलिस के अनुसार प्रतापगढ़ निवासी नीरज पाठक (22) पुत्र सुरेश पाठक करीब एक माह पूर्व शीशमहल में रहने वाले अपने भाई और जीजा के साथ रहने आया था। वह काफी दिन से नौकरी खोज रहा था लेकिन नौकरी नहीं मिली। साथ ही कैंसर और ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित होने के चलते उसकी हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ रही थी। मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी।

सोमवार दोपहर बाद करीब चार बजे वह अपने जीजा अरुण के साथ गौला बैराज घूमने गया। वहां पहुंचने के कुछ देर बाद ही युवक ने जीजा को कागज कागज दिए और बैराज के प्रतिबंधित इलाके में छलांग लगा दी।
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सुसाइड नोट पढ़ने के बाद जीजा हैरान
जीजा ने आसपास के लोगों को मदद के लिए पुकारा मगर पानी ज्यादा होने के चलते कोई नहीं आया। जीजा ने जब कागज खोलकर देखे तो हैरान रह गया। दो पन्नों के इस सुसाइड नोट में उसने लिखा था कि उसके पिता ने जिंदगी भर उसके लिए कुछ नहीं किया। पहले रेलवे में नौकरी लगवाने की बात कहकर पढ़ाई नहीं करवाई। फिर तीन साल बाद कहा कि खुद ही अपना कुछ देख ले। पढ़ा लिखा नहीं था, जिस कारण उसे नौकरी नहीं मिली।

वह डिप्रेशन, कैंसर और ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हो गया। इलाज के लिए रुपए भी न थे। पिता से नफरत और बीमारियों के चलते उसने आत्महत्या कर ली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया जबकि सुसाइड नोट सील कर दिया है।
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