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स्कूल से लौटती बच्चियों को कुचलता भागा ट्रक

Fri, 05 Sep 2014 04:18 PM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
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गुरुवार को देहरादून की सहस्त्रधारा रोड पर बेलगाम ट्रक ने दो बच्चियों की जिंदगी छीन ली। बाइक को टक्कर मारने के बाद यह ट्रक सड़क पर गिरी कक्षा दो में पढ़ने वाली चचेरी बहनों को कुचलता हुआ निकल गया।
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हादसे में बाइक चला रहे एक बच्ची के पिता भी घायल हो गए। फरार हुए ट्रक चालक को लोगों की मदद से पकड़ लिया गया। उत्तेजित लोगों ने चालक को फांसी दिए जाने की मांग करते हुए रायपुर थाने पर प्रदर्शन किया। बच्चियों की दर्दनाक मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है।

आर्डिनेंस फैक्ट्री से सेवानिवृत्त आयुध कॉलोनी निवासी विक्रम शाह गुप्ता का बड़ा बेटा रविंद्र गुप्ता घर में ही प्रोविजन स्टोर चलाता है, जबकि छोटा बेटा हरी शंकर ओएलएफ में कर्मचारी है। रविंद्र की छोटी बेटी निहारिका (8) और हरी शंकर की बेटी सारिका (8) सहस्त्रधारा रोड स्थित दून ब्लॉसम स्कूल में कक्षा दो में पढ़ती थीं।
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गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे छुट्टी के बाद हरीशंकर बेटी सारिका और भतीजी निहारिका को बाइक पर पीछे बैठाकर स्कूल से लेकर घर लौट रहे थे। स्कूल से कुछ दूर एश्वर्य बार के पास पीछे से आए बेकाबू ट्रक ने अपनी साइड पर चले रहे हरीशंकर गुप्ता की बाइक को टक्कर मार दी।

उछलकर ट्रक के सामने सड़क पर जा गिरीं बच्चियां

हरीशंकर तो बाएं तरफ गिरे, लेकिन दोनों बच्चियां उछलकर ट्रक के सामने सड़क पर जा गिरीं। इसके बाद बेकाबू ट्रक दोनों बच्चियों को कुचलते हुए निकल गया। हादसे के बाद चालक ने ट्रक की रफ्तार और तेज कर दी और वहां से भाग निकला।

पुलिस ने लोगों की मदद से प्राइवेट वाहनों में दोनों बच्चियों और हरीशंकर को मैक्स अस्पताल पहुंचाया, जहां बच्चियों को मृत घोषित कर दिया गया। जबकि, हरीशंकर की हालत खतरे से बाहर बताई गई। उधर, लोग फरार हुए ट्रक चालक की तलाश में जुटे थे।

इसी दौरान देशराज नाम के शख्स ने बाइक से पीछा कर ट्रक को सहस्त्रधारा क्रासिंग के पास पुलिस की मदद से रुकवा लिया। पुलिस ट्रक चालक कुरबान निवासी शामली को लेकर रायपुर थाने आ गई। पीछे-पीछे थाने पहुंची भीड़ ने वहां जमकर हंगामा किया। लोगों की मांग थी कि ट्रक चालक को फांसी की सजा दी जाए।

सीओ मसूरी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। उधर, दोनों बच्चियों की मौत की खबर परिवार पर कहर बनकर टूटी है। निहारिका की मां पूनम और सारिका की मां रिंकू रोते-बिलखते हुए अस्पताल पहुंचीं। उनके विलाप से वहां माहौल बेहद गमगीन हो गया।

लचर कानून, छीन लो किसी की जिदंगी

हादसों का कानून इतना लचर है कि किसी की जिदंगी छीन लो, किसी का कुछ नहीं बिगड़ता है। सहस्त्रधारा में दो बच्चियों की मौत पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने में कानून लाचार और बेबस नजर आया। जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, वो गैर जमानती है।

थाने से कोर्ट पहुंचते ही आरोपी को जमानत मिल जाएगी। आयुध कॉलोनी की आठ साल की बालिका निहारिका और सारिका की मौत के मामले में भी यही हुआ है। रविन्द्र गुप्ता की तरफ से ट्रक चालक कुरबान के खिलाफ धारा 279, 337 और 304ए के तहत मामला दर्ज किया है।

दरअसल सड़क हादसे में मौत के मामलों में पुलिस आईपीसी की धारा 304 ए (तेजी और लापरवाही से वाहन चलाकर मौत का कारण बनना )के तहत मुकदमा दर्ज करती है। यही धारा जमानती है और आरोप साबित होने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है। गंभीर चोट पर 338 और साधारण चोट पर 337 के तहत मुकदमा दर्ज होता है। यह धाराएं भी जमानती है।
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बेटियों से चिपट पर खूब बिलखी मां

पीएम के बाद दो बच्चियों के पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया। शव घर पहुंचे तो परिजनों के चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। मां और पिता तो पार्थिव शरीर से लिपटकर बिलखते रहे। बाद में गमगीन माहौल में उनकी अंतिम क्रिया की गई।

304 से किया परहेज
हादसे में किसी की मौत पर भी धारा 304 यानि गैर इरादतन हत्या का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन पुलिस इससे बचती है। हालांकि हादसे के बाद बवाल होने पर इस धारा का इस्तेमाल पुलिस करती भी है। गैर जमानती इस धारा में आरोपी को 10 साल की सजा का प्रावधान है।

साबित करना होता है मुश्किल
सड़क हादसे के मामले में गैर इरादतन हत्या का आरोप साबित करना पुलिस के लिए आसान नहीं होता है। जिन मामलों में ऐसा किया जाता है सुनवाई के दौरान वह फिर 304 ए में तरमीम हो जाती है।
- अजय सिंह एसपी सिटी
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