अपराधियों के खिलाफ वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने वाली विधि विज्ञान प्रयोगशाला के पास देहरादून नारी निकेतन में संवासिनी से रेप और गर्भपात जैसे संगीन मामले में आरोपियों के डीएनए जांच तक के लिए पैसे नहीं है।
संवासिनी के भ्रूण की डीएनए जांच तो पुलिस फंड से रकम देकर करा ली गई थी, लेकिन इस मामले समेत करीब 200 मामलों की जांच प्रयोगशाला में फंसी है। हाल में भेजे गए 20 लाख रुपये के प्रस्ताव को शासन की मेहरबानी का इंतजार है।
प्रदेश के 13 जिलों की डीएनए और दूसरी जांचों के लिए प्रेमनगर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला की मदद ली जाती है।
केमिकल और दूसरी संसाधनों की कमी की वजह से यहां जांचों की फेहरिस्त बढ़ती जा रही है। सूत्रों की माने तो एक डीएनए जांच में करीब सात हजार रुपये का खर्च आता है। बहुचर्चित नारी निकेतन में संवासिनी से रेप और गर्भपात मामले की डीएनए जांच भी धन संकट की भेंट चढ़ गई है।
भ्रूण संवासिनी का होने की पुष्टि के बाद पुलिस ने जेल में बंद दोनों आरोपियों केयर टेकर हाशिम और होमगार्ड ललित कुमार बिष्ट के अलावा तीन होमगार्ड और एक सफाई कर्मचारी की ब्लड सैंपल डीएनए जांच को भेजा था, ताकि यह साफ हो सके कि बरामद भ्रूण से किसका डीएनए मैच करता है।
केमिकल की कमी से डीएनए और दूसरी जांचों के करीब 200 मामले लंबित हैं। नौ लाख रुपये की रकम प्राप्त हुई है। प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण किया जा रहा है। हाल में 20 लाख रुपये का नया प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि रकम जल्द अवमुक्त हो जाएगी।
- अनंत राम चौहान, डीआईजी