सोमवार को देहरादून की अदालत ने सौतेली बेटी के साथ बलात्कार के प्रयास के आरोपी पिता को सजा सुनाई। इस दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि ‘रेप के मामलों में एफआईआर में हुई देरी का लाभ आरोपी नहीं ले सकता'।
एफआईआर में देरी का तर्क खारिज
कोर्ट ने कहा कि इन मामलों में लड़की की मर्यादा भी जुड़ी होती है। अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम पंकज तोमर की अदालत में बच्ची से बलात्कार के प्रयास के मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से एफआईआर में देरी के तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।
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इस पर अदालत ने कहा कि इसमें देरी होना स्वाभाविक है। अदालत ने बचाव पक्ष के उस तर्क को नहीं माना जिसमें छठवीं कक्षा में पढ़ने वाली इस बच्ची के बयानों में विरोधाभास बताया गया था।
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बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि 164 के बयान में पीड़िता कहती है कि वह घटना के दौरान किचन में गैस साफ कर रही थी, लेकिन न्यायालय में कहती है कि घटना के समय वे किचन में कपड़े बदल रही थी।
अदालत ने कहा कि पीड़िता का अदालत में बयान घटना के दो साल बाद आया है इसमें कोई कानूनी अड़चन नहीं है जो पीड़िता की गवाही पर संदेह पैदा करे। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता जया ठाकुर ने मामले की पैरवी की।
सौतेले पिता ने किया बलात्कार का प्रयास
बसंत विहार थाना क्षेत्र के इस मामले में तीन अगस्त वर्ष 2008 को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। 28 जुलाई वर्ष 2008 को हुई इस मामले में स्कूल से घर लौटी छठवीं कक्षा की बच्ची रसोई में कपड़े बदल रही थी।
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तभी सौतेले पिता ने उससे बलात्कार का प्रयास किया। मामले में अभियोजन की ओर से अदालत में सात गवाह पेश किए गए। अदालत ने दोषी अनिल कुमार को सजा सुनाई।
न्याय के लिए भटक रही दुराचार पीड़िता
डीजीपी के आदेश के बावजूद दुराचार की पीड़ित दलित महिला दर-दर भटकने को मजबूर है। आरोपी की गिरफ्तारी तो दूर पुलिस ने मुकदमा तक दर्ज नहीं किया है।
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श्रीनगर गढ़वाल से एक बार फिर दून पहुंची पीड़ित महिला ने डीजीपी बीएस सिद्धू से न्याय की गुहार लगाई है। डीजीपी ने कोटद्वार की पुलिस क्षेत्राधिकारी अरुणा भारती को मामले की जांच सौंपी है।
श्रीनगर निवासी महिला ने बताया कि 10 अक्तूबर 2013 को पड़ोसी व्यापारी रिवॉल्वर दिखाकर उसे एक मंदिर में ले गया और जबरन मांग में सिंदूर भर दिया। इसके बाद आरोपी ने उसे बंधक बनाकर दुराचार किया।
निष्पक्ष जांच के निर्देश
उसका पति बीमार है और इस वक्त दून के एक निजी अस्पताल में भर्ती है। आरोप है कि शिकायत लेकर जब महिला श्रीनगर थाने गई तो उसे वहां से भगा दिया। महिला की शिकायत पर 19 दिसंबर को डीजीपी बीएस सिद्धू ने एसपी पौड़ी को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे।
उधर, श्रीनगर के पुलिस क्षेत्राधिकारी सीएस तितियाल ने बताया कि जांच में आरोप गलत साबित हुए। महिला जिस व्यक्ति पर आरोप लगा रही वह विकलांग है। चिकित्सा विभाग ने उसे पचास फीसदी विकलांग होने का प्रमाणपत्र जारी किया है।