राजधानी देहरादून के आनंदग्राम में शुक्रवार सुबह 10: 40 बजे संजय को पत्नी लक्ष्मी ने कहा कि नाश्ते में दूध के साथ अंडे और ब्रेड बना देती है। कुछ सोचते हुए दूध का गिलास फ्रिज पर रख संजय बाहर निकल गए।
काम कर रहे मजदूरों को कुछ समझा रहे थे कि तभी छोटे कद के तीन युवक आए और ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। लोग जब तक कुछ समझते, बदमाश भाग निकले।
समझ नहीं पाए लोग
गोली की आवाज सुनने पर लोगों ने समझा कि कालोनी के ऊपर से गुजरने वाले बिजली के तारों में शायद स्पार्किंग हो रही है। बाहर देखा तो दंग रह गए।
मिस्त्री हरिनंदन ने बताया कि संजय के जमीन पर गिरने पर बदमाश भागे, फिर लौटकर और दो-तीन गोलियां चलाईं। बदमाशों ने घर तक पहुंचने के लिए नालापानी चौक रोड से कब्रिस्तान वाला संकरा रास्ता चुना। झाड़ियों से वे करीब 200 मीटर पैदल चलकर संजय के घर तक पहुंचे और उसी रास्ते फरार हुए।
कुछ ही दूर दवाई लेकर लौट रहे 60 वर्षीय जनक ने बताया कि उन्होंने तीन लड़कों को भागते देखा। एक ने नीली, दूसरे ने सफेद और तीसरे ने काली कमीज पहनी थी। अंदेशा है कि बदमाशों ने पहले कुछ दिन आसपास रेकी की होगी। नालापानी रोड पर वाहन खड़ा कर फरार हुए होंगे।
कई सुरागों से उलझ रही गुत्थी
पुलिस को कई सुराग मिलने से जांच उलझ रही है। करीब ढाई साल पहले दून आए संजय ने कभी किसी को ठीक से अपना दिल्ली का पता भी नहीं बताया। पत्नी लक्ष्मी भी अनभिज्ञता जता रही है।
पुलिस को पता लगा है कि बच्चे न होने पर संजय ने पहली पत्नी छोड़कर लक्ष्मी से कोर्ट मैरिज की थी। पड़ोस में रह रही लक्ष्मी से प्रेम हुआ था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, लक्ष्मी का भी पूर्व में रिश्ता टूट चुका था। लक्ष्मी ने रोते-रोते बताया कि भगवान ने मुश्किल से मुराद पूरी की थी। अब दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।