प्रदीप सांगवान यौन शोषण प्रकरण में एक्सटॉर्शन के आरोप में पकड़ी गई पीड़ित युवती और उसके दोस्त को पुलिस ने बुधवार को विशेष मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। हालांकि दोनों ने पुलिस कार्रवाई को झूठ का पुलिंदा बताया है।
एसआईटी और एसटीएफ की टीम ने मंगलवार को यौन शोषण की शिकार पीड़िता को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उसने अपने दोस्त की मदद से सांगवान से मोटी रकम वसूली है। पीड़िता के घर से छह लाख रुपये के अलावा दो मई को खरीदे गए मकान की रजिस्ट्री जब्त की गई थी।
दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
दारोगा नीलम रावत ने युवती और उसके साथी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद युवती को मंगलवार रात करीब 11:15 बजे कोतवाली लाया गया। यहां उसे महिला कांस्टेबलों की अभिरक्षा में रखा गया।
किच्छा में गिरफ्तार उसके साथी सईद चौधरी को भी देर रात कोतवाली लाया गया। बुधवार को दिन भर की पूछताछ के बाद दून अस्पताल में दोनों का मेडिकल कराया गया। तीसरे पहर उन्हें विशेष मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
पुलिस ने फंसाया, मिला ऑफर
यौन शोषण की शिकार पीड़ित युवती ने पुलिस के आरोपों को झुठला दिया है। उसका कहना है कि सांगवान को गिरफ्तार करने के बजाए पुलिस ने उसे ही फंसा दिया है। समझौते के लिए उस पर भारी दबाव था। लगातार ऑफर मिल रहा था। 20 सेकंड की बातचीत में वह यही कहती रही।
मदद के लिए करता था बात
पीड़िता के दोस्त सईद चौधरी निवासी किच्छा का कहना है कि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। सांगवान से उसका कोई नाता नहीं है। उसके और पीड़िता के बीच भाई-बहन जैसा रिश्ता है।
इसी नाते वह मदद के लिए उससे बात करता था। सांगवान की तरफ से ऑफर मिलने की बात पीड़िता ने उसे जरूर बताई थी।
सुबूत तलाशने में जुटी पुलिस
एसपी ममता बोरा ने कोतवाली में पुलिस टीम के साथ पीड़िता और उसके दोस्त से कई घंटे अलग-अलग पूछताछ की। बाद में उनका आमना-सामना भी कराया गया। पुलिस अपनी कहानी की पुष्टि के लिए साक्ष्य जुटाने में मशगूल रही। पीड़िता और सईद के रिश्तों पर भी काफी पूछताछ हुई। हालांकि, अधिकारिक तौर पर कोई अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। एक अधिकारी ने बताया कि जरूरत पड़ने पर दोनों को रिमांड पर लिया जाएगा।
कौन है ‘डील’ का गुप्तचर
यौन शोषण प्रकरण में जॉयलैंड के मालिक प्रदीप सांगवान और पीड़िता के बीच हुई ‘डील’ का मुखबिर कौन है। पूरी डील क्या थी, कितना कैश युवती को मिला और कितना मिलना था। इस डील में कौन-कौन शामिल था?
इन तमाम सवालों को लेकर दिन-भर गहमागहमी रही। इन सवालों पर पुलिस ने अभी चुप्पी साधी हुई है। सांगवान की गिरफ्तारी में हुई लापरवाही पर उठे सवाल का जवाब भी पुलिस के पास नहीं है।
पुलिस ने गुपचुप हुई डील का खुलासा तो कर दिया, लेकिन कई अहम सवालों का जवाब नहीं दिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि गुप्त रूप से चल रही डील की जानकारी पुलिस को कैसे मिली।
मुखबिर के नाम पर कयासों का सिलसिला जारी है और लोग पूरा सच जानने को आतुर हैं। यूं तो पुलिस कभी मुखबिर का नाम उजागर नहीं करती, लेकिन इस मामले को अलग माना जा सकता है। लोग जानना चाहते हैं कि इस मुखबिरी के पीछे कोई और कहानी तो नहीं छिपी है।