नोएडा में बृहस्पतिवार को हुई 3700 करोड़ रुपये की ठगी तो महज बानगी है। देहरादून की बात करें तो यहां भी ऑनलाइन ठगों का एक बहुत बड़ा गिरोह सक्रिय है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते छह माह में विभिन्न थानों में ऑनलाइन ठगी के 29 मामले दर्ज हुए हैं। पुलिस इनमें से करीब एक दर्जन मामले ही खोल सकी है। जबकि बड़ी संख्या में मामले थाने नहीं पहुंच पाते हैं।
ऑनलाइन ठग युवाओं को प्रलोभन देकर अपना शिकार बना रहे हैं। घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से पैसा कमाने के नाम पर करोड़ों के वारे-न्यारे किए जा रहे हैं। वहीं, अन्य स्कीमों के जरिये भी गिरोह के सदस्य ग्राहकों को फंसाकर ठगी करते हैं। सारा कारोबार ऑनलाइन होने के कारण ज्यादातर गिरोह पुलिस की गिरफ्त से बच निकलते हैं।
देहरादून के लक्ष्मणपुर चौक निवासी राहुल को एक व्यक्ति ऑनलाइन वेबसाइट के प्रमोशन के जरिये पैसा कमाने का सपना दिखाता है। युवक उसके झांसे में आ जाता है और करीब 57 हजार रुपये उसे दे देता है। युवक को एक आईडी दी जाती है, लेकिन कुछ दिनों बाद ही व्यक्ति लापता हो जाता है। देहरादून के जीएमएस रोड निवासी समीर कुमार को घर बैठे इंटरनेशनल कंपनी के लिए काम कर पैसा कमाने का सब्जबाग दिखाया जाता है। बदले में युवक से करीब 30 हजार रुपये ऐंठ लिए जाते हैं। इसके बाद संपर्क करने पर मोबाइल नंबर स्विच ऑफ आता है।
इस तरह बनाते हैं शिकार
Fraud
- नामी गिरामी कंपनियों के नाम पर ईमेल के जरिये नौकरी का ऑफर देना।
- कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम के नाम पर भारी रिटर्न का वादा।
- इंश्योरेंस रेगुलेटरी अथॉरिटी(आईआरडीए) के नाम पर इंश्योरेंस पॉलिसी बेचना।
- एलआईसी बोनस ट्रांसफर का ऑफर।
- यूके में लॉटरी पाने के नाम पर ईमेल के जरिये बैंक अकाउंट, पैन नंबर आदि की जानकारी।
- वेबसाइट को क्लिक करवाने के नाम पर घर बैठे पैसा देने का ऑफर।
महिलाओं और स्टूडेंट को बनाते हैं टारगेट
ऑनलाइन फ्रॉड
- फोटो : फाइल फोटो
ऑनलाइन ठग ज्यादातर महिलाओं और स्टूडेंट को टारगेट बनाते हैं। इसके अलावा रिटायर्ड व्यक्ति, कर्मचारी और बिजनेसमैन को भी आकर्षक स्कीमों की जानकारी देकर शिकार बनाया जाता है।
पिछले छह माह में हुई ऑनलाइन ठगी के मामले
जुलाई - 4
अगस्त - 6
सितंबर - 4
अक्टूबर- 4
नवंबर- 5
दिसंबर- 6
(आंकड़े जुलाई से दिसंबर 2016 के हैं।)
ऑनलाइन ठगी के काफी मामले आ रहे हैं। इसे लेकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है, लेकिन लोगों को भी जागरूक होने की आवश्यकता है।
- पी रेणुका, एसटीएफ एसएसपी