नेशनल हाईवे के लिए होने वाले भूमि अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और घपले की जांच में सितारगंज एसडीएम ऑफिस के राजस्व अहलमद संतराम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
संतराम पर 2011-12 की 7 फाइलों में हेरफेर करने का आरोप है। आरोपी संतराम अभी तक फरार चल रहा था। वहीं जांच सीबीआई द्वारा अब तक स्वीकार न करने पर मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है।
इस पत्र में उन्होंने घपले के मुख्य बिंदुओं का उल्लेख भी किया है और यह भी कहा है कि उत्तराखंड के हित में इस मामले की सीबीआई से जांच कराना आवश्यक है। उधर, खबर यह भी है कि घपले की जद में आ रहे अधिकारियों और दलालों ने अपने संपर्कों के जरिए सीबीआई जांच को रुकवाने में ताकत झोंक रखी है।
पश्चिमी यूपी से उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र को कनेक्ट करने वाले नेशनल हाईवे-74 के लिए भूमि अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर घपला सामने आया है। अधिकारियों की मिलीभगत से कृषि भूमि को बैकडेट में अकृषि भूमि दिखाकर कई गुना मुआवजा ले लिया गया। एक अनुमान के मुताबिक इसमें अब तक तीन सौ करोड़ से ज्यादा का घपला सामने आ चुका है।
राज्य सरकार करीब आठ अफसरों को इस घपले में शामिल होने के आरोप के चलते निलंबित भी कर चुकी है। साथ ही पखवाड़े भर पूर्व मुख्यमंत्री ने मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति भी की है। मगर अब तक सीबीआई के स्तर से जांच करने या न करने को लेकर फैसला नहीं हुआ है। इसे देखते हुए पहले मुख्य सचिव और अब मुख्यमंत्री ने रिमाइंडर के लिए पत्र लिखा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखे गए इस पत्र में पूरे घपले की गंभीरता का जिक्र करने के साथ ही इसकी जल्द से जल्द जांच आरंभ करवाने का अनुरोध किया गया है। उधर, शासन को इस बात की भी जानकारी मिली है कि यह जांच सीबीआई के स्तर से न हो, इसके लिए समानांतर ताकत लगाई जा रही है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में बड़े पैमाने पर अफसरों के अलावा राजनेताओं और जमीन के बड़े दलालों का नाम भी सामने आएगा। ऐसे में एक लॉबी यह बिल्कुल नहीं चाहती कि जांच सीबीआई के स्तर से की जाए।