गैंगरेप पीड़िता के मामले में रसूखदारों के आगे पुलिस की बेबसी तो खुल ही चुकी है। एक और मामला है, जिसमें ऐसा ही दबाव करीब पांच साल पूर्व जान गंवा चुकी दून की एक बिटिया को इंसाफ की राह में रोड़े अटका रहा है।
यह मामला है अंशु नौटियाल का। डीएवी की इस छात्रा का शव डीएम आवास के बाहर बरामद किया गया था। तब एक नेता और एक रसूखदार का नाम उछला था, लेकिन पुलिस दोनों की गिरफ्तारी नहीं कर सकी।
न्याय की राह ताक रहे परिजन
पुलिस ने जिसे आरोपी बनाया, वह भी निचली अदालत से बरी हो गया। अंशु के परिजन आज भी असल हत्यारों की गिरफ्तारी और बेटी को न्याय की राह तक रहे हैं।
चकराता रोड स्थित सुमन नगर निवासी अंशु नौटियाल (19) का शव 25 मई 2009 को डीएम आवास के बाहर एक बोरे में बंद मिला था। उसके चेहरे पर तेजाब भी फेंका गया था।
प्रदर्शन के बाद हरकत में आई पुलिस
अंशु पलटन बाजार स्थित एक पीसीओ में पार्टटाइम नौकरी करती थी। डीएम आवास के बाहर शव मिलने और शहर में हुए धरना-प्रदर्शनों के बाद पुलिस हरकत में आई।
लूनिया मोहल्ला निवासी एक युवक को गिरफ्तार कर पुलिस ने मामले के खुलासे का दावा किया। पुलिस की कहानी के मुताबिक इस युवक ने एकतरफा प्यार में प्रेमिका के पिता को फंसाने के लिए अंशु का इस्तेमाल किया और उसकी हत्या कर दी।
मुकदमे से गायब रसूखदार
मौत से पहले उसने अंशु से डायरी में प्रेमिका के पिता का नाम भी लिखवाया। मामले में तत्कालीन सत्ताधारी दल के एक नेता और उसके प्रभावशाली साथी का नाम भी उछला लेकिन पुलिस ने दबाव में मुकदमे में उनका नाम तक शामिल नहीं किया।
परिजनों, शहरवासियों और डीएवी के छात्रों ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाकर असल हत्यारों को पकड़ने की मांग की, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
उलझा रही पुलिस की कहानी
सरकार ने सीबीसीआईडी जांच के आदेश भी दिए, लेकिन अब तक अंशु को इंसाफ नहीं मिल सका है। बाद में गिरफ्तार युवक भी बरी हो गया।
अंशु के भाई हरीश नौटियाल का कहना है कि वे शुरुआत से ही सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन पुलिस नेताओं के दबाव में सही पैरवी नहीं कर रही। पुलिस के कहानी उलझाने की वजह से उन्हें आज तक न्याय नहीं मिल पाया है।