नकरौंदा में सहायक कृषि अधिकारी के घर डकैती के दौरान बेटे की हत्या के मामले में पुलिस उलझकर रह गई है। तमाम कवायद के बाद कोई लाइन लैंथ तय नहीं कर पा रही है।
फजीहत झेल रही पुलिस छह दिन बाद दो बदमाशों के स्कैच जारी करने की फुरसत निकाल सकी। इनमें से एक मुंह पर रुमाल बांधे हुए है।
पुलिस ने अब बावारियां और सपेरा जाति के बदमाशों पर नजरें गड़ा दी है। दिन भर की कार्रवाई की शासन और मुख्यालय स्तर पर समीक्षा होती रही। नकरौंदा कांड के खुलासे के दबाव में पुलिस के पसीने छुड़ा रखे हैं।
पुलिस के पसीने छूटे
ग्रामीणों के आंदोलन और बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर सीएम हरीश रावत भी कड़ी नाराजगी जता चुके है।
डकैती और हत्या को वारदात को हुए छह दिन बीत गए है, लेकिन पुलिस जांच जस की तस बनी हुई है। लोकल बदमाशों के साथ वेस्ट यूपी के कई गैंग खंगालने के बाद भी पुलिस को कुछ हासिल नहीं हो सका है।
अब बावारियां और सपेरा जाति के बदमाशों की संलिप्तता की संभावनाओं को तलाश रही है। पुलिस की छह टीमे वेस्ट यूपी के जिलों में संदिग्धों की टोह में लगी रही।
मुखबिर तंत्र की कमजोरी पुलिस के सामने सबसे बड़ा रोड़ा बनकर उभरी है। एडीजी ने दून पुलिस को अनावरण के प्रयास में जुटने के लिए कहा था, लेकिन अभी तक पूरी ताकत झोंकने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
बेटे की हत्या की साजिश तो नहीं
सोमवार को पुलिस ने पीड़ित परिवार केहुलिए के आधार पर बनाए गए दो बदमाशों के स्कैच जारी कर दिए। एसएसपी अजय रौतेला ने बताया कि प्रयासों में कमी नहीं है, जल्द ही अच्छे परिणाम सामने आने की उम्मीद है। अब तक की कार्रवाई से यह बात तो साफ हो गई है कि घटना किसी बाहरी गैंग द्वारा अंजाम दी गई है।
सहायक कृषि अधिकारी सुरेन्द्र सिंह थपरियाल को आशंका है कि उसके बेटे अंकित थपलियाल की साजिश के तहत तो हत्या नहीं की गई है। हालांकि एसएसपी अजय रौतेला ने बातचीत में उनकी आशंका को निर्मूल करार दिया।
रौतेला के मुताबिक विरोध के दौरान अंकित की हत्या की गई है। अब तक की जांच से तो यही पता लगता है, लेकिन पूरी बात बदमाशों के पकड़े जाने के बाद ही सामने आ पाएगी।