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12 लाख नहीं दिए तो बेरहमी से कर दिया कत्ल

Tue, 07 Jul 2015 10:34 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून के पटेलनगर से अगवा ईंट सप्लायर ओमप्रकाश वर्मा की हत्या कर शव को शामली क्षेत्र में रेत की ढांग में दबा दिया गया। मंगलवार की सुबह पुलिस ने दूसरा आरोपी सुनील उर्फ काला को भी गिरफ्तार कर लिया है।
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वर्मा को देहरादून से अगवा कर कार से शामली ले जाया गया, जहां पर रस्सी से गला घोंटा गया। पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर शव को बरामद कर लिया। पुलिस का दावा है कि वर्मा का कत्ल 12 लाख रुपए के लेन-देन के विवाद में हुआ है। हत्या में शामिल अन्य आरोपी की तलाश में पुलिस की दबिश चल रही है।

देहरादून के गोरखपुर चौक निवासी ईंट सप्लायर ओमप्रकाश वर्मा (58) 27 जून की शाम को गायब हो गए थे। 29 जून को अनहोनी की आशंका जताते हुए बेटी दया वर्मा ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने 3 जुलाई को गुमशुदगी अपहरण में तरमीम कर ली थी।
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पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जीसी ध्यानी ने बताया कि जांच में पता चला कि ओमप्रकाश का शामली जिले के लपराना निवासी जोनी कुमार से लेन-देन का विवाद चल रहा था। शनिवार को जोनी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो आरोपी ने वर्मा की हत्या करने की बात कबूल ली।

जोनी ने बताया कि 2013 में ओमप्रकाश वर्मा को उसके द्वारा करीब साढ़े बारह लाख रुपए की ईंट सप्लाई की गई थी, जिसमें से सिर्फ 40 हजार रुपए प्राप्त हुए। बाकी रकम को लेकर वर्मा उन्हें टरकाता आ रहा था। 27 जून को वर्मा ने भुगतान के लिए फाइनल डेट दी थी।

इसलिए वह अपने मामा के लड़के सुनील उर्फ काला के साथ कार किराए पर लेकर दून आया था। शाम चार बजे के करीब सप्लायर ओमप्रकाश ने जीएमएस रोड आकर रुपए की व्यवस्था न होने की बात कही तो उनका दिमाग घूम गया। साजिश के तहत दूसरे सप्लायर के पास से रकम लाने का बहाना करके ओमप्रकाश को कार में बैठा लिया।

मंडी चौक के पास कोल्डड्रिंक में नशे की तीन गोलियां मिलाकर पिला दी गई, जिससे वह बेहोश हो गया। दून से अगवा कर उसे शामली के कुड़ाना गांव ले गए। सुनील के ट्यूबवेल पर रस्सी से गला घोंटकर मारने के बाद वर्मा के शव को रेत की ढांग के नीचे दबा दिया गया।

पुलिस ने उसकी निशानदेही पर शामली (यूपी) कोतवाली क्षेत्र के कुड़ाना गांव से शव बरामद कर लिया। जोनी के साथी सुनील उर्फ काला की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। निशानदेही पर अपहरण में प्रयुक्त कार के अलावा सिम और रस्सी बरामद करने का दावा किया गया है।

डीआईजी संजय गुंज्याल ने पुलिस टीम में शामिल इंस्पेक्टर पंकज गैरोला, एसएसआई नत्थीलाल उनियाल, विक्रम सिंह रावत और ऋषिकेश थाने के सिपाही देवेंद्र को पांच हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की।

रकम अदा करने को दिया किस्त का मौका
मुख्य आरोपी जोनी की मानें तो ओमप्रकाश को किस्तों में रकम देने का भी मौका दिया गया था। मामा के  लड़के सुनील ने 3 लाख रुपये देकर ओमप्रकाश के नाम स्विफ्ट कार खरीदी थी। कार की किस्त के रूप में 10 हजार रुपये जमा कराने की जिम्मेदारी वर्मा ने ली थी। इसके अलावा सप्लायर की मोटर साइकिल और टाटा 207 भी ली गई थी, लेकिन वर्मा ने उनकी भी किस्त जमा नहीं की।

...कर लिया जिंदगी की बत्ती बुझाने का फैसला
ओमप्रकाश के इनकार के बाद जोनी और सुनील ने हत्या का फैसला किया। जोनी भट्टे और सप्लायर के बीच एजेंट का काम करता था। जोनी ने पुलिस को बताया कि जिन भट्टों से ईंट ली गई थी, उनका भारी दबाव था।

इस कारण रकम ब्याज पर लेकर उनका भुगतान किया था। दोनों को उम्मीद थी कि फाइनल डेट होने के कारण ओमप्रकाश उन्हें रकम दे देगा। सप्लायर ने जब रुपये न होने की बात कही तो उनका पारा चढ़ गया। इसके बाद दोनों ने तय किया कि इस दगाबाजी की सजा ओमप्रकाश को मौत के रूप में दी जाए।

सिम और मोबाइल तोड़ा
ईंट सप्लायर के बेहोश होने के बाद आरोपियों ने मोहंड के पास उसका सिम तोड़कर फेंक दिया। मोबाइल को हत्या करने के बाद कु ड़ाना गांव के जंगल में तोड़ा गया, ताकि पुलिस मोबाइल के जरिए लोकेशन न पता कर सके।

व्यापारी वर्ग से लेन-देन में पारदर्शिता रखने की अपील की है। देखने में आ रहा है कि लेन-देन की वजह से अपराध को बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे में जरूरी है कि रुपए का लेन-देन सोच समझकर करने के साथ उसे लंबा खींचने से बचा जाए।
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- अजय सिंह, पुलिस अधीक्षक नगर
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