शादी के चार माह के अंदर ही विवाहिता की दहेज के लिए हत्या करने के आरोपी पति, सास और ससुर को दोषी पाते हुए न्यायालय ने दस-दस वर्ष के साधारण कारावास और एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं देवर को दोष मुक्त कर दिया गया है।
शासकीय अधिवक्ता नीरज गुप्ता ने बताया कि वादी धीरज पुत्र पतंगाराम निवासी बिल्वकेश्वर रोड वाल्मीकि बस्ती हरिद्वार ने 27 अप्रैल-2012 को अपनी बहन अमिता की हत्या का आरोप लगाते हुए उसके पति अनिल, देवर राकेश, सास अनीता और ससुर रमेशचंद पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
उसका कहना था कि उसकी बहन की शादी 27 जनवरी 2012 को अनिल पुत्र रमेश चंद निवासी वाल्मीकि बस्ती पुल जटवाड़ा घासमंडी ज्वालापुर के साथ हुई थी। वादी ने बताया की अमिता के ससुराल वाले उसे दहेज के लिए परेशान करते थे।
मृतका ने भाई को बताई थी फोन पर बात
22 अप्रैल को अमिता ने अपने भाई अमित को बताया था कि उसका पति अनिल, सास अनीता, ससुर रमेशचंद और देवर राकेश दो लाख रुपये मांग रहे हैं। रुपये न देने पर जान से मारने की धमकी देते हैं और उसके साथ बुरा व्यवहार करते हैं। 25 अप्रैल 2012 को अमिता अचानक गुम हो गई थी। बाद में उसकी लाश मिली।
पुलिस ने जांच के बाद मृतक के पति व ससुराल के अन्य लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। न्यायालय में उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 12 गवाह पेश किए गए।
दोनों पक्षों के साक्ष्यों और बहस को सुनने के बाद प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मलिक मजहर सुल्तान ने पति अनिल, सास अनीता, ससुर रमेश चंद को मृतक अमिता की दहेज के लिए हत्या करने का दोषी पाते हुए दस-दस वर्ष के साधारण कारावास व एक एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। जबकि आरोपी देवर राकेश को दोष मुक्त कर दिया है।