हरिद्वार के गांव जसवावाला में एक निजी फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी की बाइकसवार तीन बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर अस्सी हजार रुपए लूट लिए। देर शाम तक पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए नाकेबंदी की लेकिन कहीं पता नहीं चल पाया।
तीन बदमाशों ने मारी सोनू को गोली
ज्वालापुर के आर्यनगर चौक क्षेत्र में भारतीय समृद्धि फाइनेंस कंपनी का कार्यालय है। यह कंपनी गांव की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराती है। कंपनी में पथरी के पुरुषोत्तम नगर का सोनू (25) पुत्र रजवीर कलेक्शन का काम करता था।
हर महीने की सात तारीख को सोनू बहादराबाद क्षेत्र के गांव कोटामुरादनगर एवं जसवावाला में कलेक्शन के लिए जाता था। शाम को जसवावाला गांव से निकलते ही बाइक सवार तीन बदमाशों ने सोनू को गोली मार दी। छाती पर लगी गोली से सोनू घायल हो गया और बाइक से गिर गया।
इसी बीच बाइकसवार तीन बदमाश बैग लेकर फरार हो गए। गोली की आवाज सुनकर घटनास्थल पर एकत्रित हुए ग्रामीणों ने खून से लथपथ सोनू को रुड़की के सिविल अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हत्या कर लूट की सूचना पर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्वीटी अग्रवाल, सीओ सदर राजेश भट्ट, थानाध्यक्ष राजीव रौथाण सिविल अस्पताल पहुंचे। साथ ही बदमाशों की धरपकड़ के लिए जिलेभर में अभियान चलाया। लेकिन देर शाम तक बदमाशों का पता नहीं चला।
एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने बताया कि करीब अस्सी हजार रुपए लूटने की बात सामने आई है। हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस टीमें गठित कर दी गई हैं। एसओजी को भी खुलासे के लिए लगाया गया है।
गांव से जुड़े हत्या के तार
माना जा रहा है कि अपराधी भली-भांति जानते थे कि हर महीने की सात तारीख को सोनू गांव कोटा मुरादनगर एवं जसवावाला में कलेक्शन के लिए पहुंचता है। पुलिस भी दबीं जुबां में बोल रही है कि इन दो गांव से ही हत्याकांड के तार जुडे़ हो सकते हैं।
गांव के आपराधिक पृष्ठभूमि के युवाओं को सूचीबद्ध करने की एक्सरसाइज तेज कर दी गई है। वर्ष 2009 से सोनू इस कंपनी में कार्यरत है। तब से वह वसूली की ही जिम्मेदारी संभाले हुआ था और इन दो गांव के अलावा अन्य कई गांव से भी वसूली करता आ रहा था।
गांव जसवावाला एवं कोटामुरादनगर में करीब कंपनी के 80 एकाउंट है। कंपनी के एग्जूक्यूटिव पांडेय ने भी बताया कि दो गांव से करीब सवा लाख रुपए कंपनी वसूली करती थी। ऐसे में यह बात बलवती हो गई है कि हो न हो अपराधी काफी दूरी से सोनू के पीछे लगे हु़ए थे।
या फिर गांव में ही छिपकर उसके लौटने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन बदमाश जानते थे कि ये वसूली करने सात तारीख को आएगा।