युवक को बेटी की शादी और रोजगार का लालच देकर उसकी किडनी निकाल दी गई। वह पहले ही सड़क हादसे में अपने दोनों पैर गवां चुका था।
जानकारी के अनुसार, रंपुरा वार्ड नंबर आठ निवासी भगवान स्वरूप अगर अपने पैरों की कमजोरी से लाचार नहीं होता तो शायद उसे अपनी किडनी किसी और को नहीं देनी पड़ती। लोगों को अपना खून देकर उनकी जान बचाने वाला भगवान स्वरूप चार साल पहले रक्तदान करने जा रहा था।
इसी दौरान वह सड़क दुर्घटना में घायल हो गया। उसके बाद वह दोनों पैरों से लाचार हो गया। रुद्रपुर के सुभाष कॉलोनी में क्लीनिक चलाने वाले एक डाक्टर ने उसका इलाज किया और यहीं से उसका डाक्टर से गहरा परिचय हो गया।
भगवान स्वरूप के अनुसार जब ट्रांसपोर्टर को किडनी की जरूरत पड़ी तो सुभाष कॉलोनी के डाक्टर ने ही उसके बारे में ट्रांसपोर्टर को बताया कि वह जरूरतमंद है, बात करने पर उसे किडनी देने के लिए राजी किया जा सकता है। इस पर ट्रांसपोर्टर ने छानबीन कर पता लगाया कि भगवान स्वरूप शहर में ईंट और रेता का काम करने वाले एक व्यापारी के यहां काम करता है।
kidney stolen
इस पर उसने व्यापारी से भगवान स्वरूप के संबंध में बातचीत की। भगवान स्वरूप के अनुसार ट्रांसपोर्टर ने उसे किडनी दान करने के बदले भविष्य में उसकी बेटी की शादी करने, उसे अपने होटल में 25 से 30 हजार वेतन की नौकरी देने और नौकरी न कर पाने की स्थिति में मनचाहा कारोबार खोलकर देने का वादा किया।
इसके बाद चंडीगढ़ ले जाकर एक अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपित की गई। रुद्रपुर आने पर कुछ दिन उसका इलाज कराया और उससे पल्ला झाड़ लिया। अब भगवान स्वरूप ने एसएसपी डा. सदानंद दाते, डीजीपी, डीआईजी कुमाऊं परिक्षेत्र, मानवाधिकार आयोग और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
एसएसपी ऊधमसिंह नगर डा. सदानंद दाते का कहना है कि रोजगार का लालच देकर किडनी निकालने का मामला संज्ञान में आया है, लेकिन पीड़ित की तरफ से कोई तहरीर नहीं मिली है। मामला गंभीर है। पीड़ित से बात करने के बाद गहन जांच की जाएगी।