वेस्ट यूपी में अपहरण कोई नई बात नहीं है, पर देहरादून से मनोज गुप्ता का अपहरण केस कुछ अलग है।
इसमें अपहरणकर्ताओं ने जो तरीका अपनाया वो यूपी से लेकर अपहरण इंडस्ट्री कहे जाने वाले बिहार के लिए भी नया है। इस केस में एक लड़की ने मनोज को मिस्ड कॉल मारी इसके बाद मनोज उसे फंसाने में जुट गया, या यूं कहे कि वह खुद अपहरणकर्ताओं के जाल में फंसता चला गया।
अपहरणकर्ताओं की युवती के सहारे शिकार मनोज को सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचाकर फिरौती की तैयारी थी। पर इसी बीच फार्म हाउस के नौकर की सूचना ने पूरा खेल ही बिगाड़ दिया। जुर्म की दुनिया के पुराने खलीफा अपहरण के हर रिस्क से वाकिफ हैं, इसलिए उन्होंने देहरादून के डूंगा फार्म हाउस से मेरठ के कारोबारी मनोज गुप्ता को सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचाने के लिए ममता नाम की युवती को मनोज को फंसाने का जिम्मा सौंपा।
वो जानते थे कि पकड़ के हाथ में आते ही बिना शोर-शराबे के फिरौती की रकम झोली में आ जाएगी। मिस्ड काल के जरिए सात दिन पहले संपर्क में आई ममता मसीह अपने आका के इशारे पर मनोज गुप्ता पर अपना जादू बिखेरती चली गई। सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से हुआ, लेकिन मारपीट से निकले खून ने उनकी फुलप्रूफ प्लानिंग को लीक कर दिया।
एसएसपी डा. सदानंद दाते ने बताया कि अपहरण की जानकारी शायद ही पुलिस को मिल पाती, क्योंकि योजना ही कुछ ऐसी बनाई गई थी। खून आदि नहीं मिलता तो नौकर उमेश गुप्ता भी चुप रहता। वैसे तो अपहरण में महिलाओं की संलिप्तता उजागर होती रहती है, पर खूबसूरती के सहारे अपहरण का यह नया ट्रेंड है।
कराची तक गई है ममता?
मनोज गुप्ता के अपहरण में अहम किरदार ममता मसीह कौन है और उसकी क्या पृष्ठभूमि है। यह रहस्य अभी बरकरार है। पुलिस अभी दिल्ली और गुड़गांव में उसका सही ठिकाना तक नहीं खोज पाई है। ममता के फेसबुक से कई ऐसी जानकारियां मिली हैं, जिनकी पुष्टि होना बाकी है।
चर्चाएं उसके एयरहोस्टेस होने की भी है। एसपी सिटी अजय सिंह का कहना है कि फेसबुक पर कराची, जम्मू काश्मीर के दौरे की तस्वीर तक पोस्ट है। इसकी सच्चाई तो उसके गिरफ्त में आने के बाद ही पता लग पाएगी। फिलहाल ममता ने फेसबुक एकाउंट डी-एक्टिवेट कर दिया है।