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दोस्त की मदद से अपराधियों ने हार्दिक को किया था किडनैप

Tue, 28 Jul 2015 01:46 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून-ऋषिकेश
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50 लाख रुपए की फिरौती के लिए किडनैप किए गए ऋषिकेश के स्कूल संचालक का बेटा हार्दिक रावत सोमवार को शामली से सकुशल बरामद कर लिया गया।
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पुलिस ने किडनैपर दो सगे भाइयों को फिरौती में वसूली गई साढ़े 17 लाख रुपए की रकम के साथ गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि अपहरण में मददगार बने हार्दिक के दोस्त सत्यम को फिरौती की हिस्सेदारी में विवाद पर उन्होंने गला घोटकर मार डाला। शव बोरी में बंद कर गंगनहर में फेंक दिया। मामले में पुलिस एक महिला समेत दो लोगों की संलिप्तता की पड़ताल में जुट गई है।

ऋषिकेश निवासी प्राइवेट स्कूल के मालिक राहुल रावत के बेटे हार्दिक रावत (13) को 23 जुलाई की शाम अगवा कर लिया गया था। हार्दिक के फोन से की गई कॉल में अपहरणकर्ताओं ने रिहाई के बदले 50 लाख रुपए मांगे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पुष्पक ज्योति ने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने सोमवार को सहारनपुर से दिल्ली जाने वाली ट्रेन में शामली के पास 18 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी।
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पिता राहुल रावत लाल बैग में साढे़ 17 लाख रुपए लेकर गए। शामली के बलवा के पास चलती ट्रेन से नोटों से भरा बैग फेंक दिया। अपहरणकर्ता रोहित बैग उठा ले गया। पुलिस रोहित का पीछा करते हुए घर तक पहुंची, जहां से हार्दिक को बरामद करने के साथ अपहरणकर्ता भाइयों रोहित, मोहित को दबोच लिया गया।

पूछताछ में बताया कि रविवार रात दोनों ने तीसरे साथी सत्यम की हत्या करने के बाद शव बोरी में बंद कर गंगनहर में फेंक दिया। आरोपियों के मुताबिक हत्या सत्यम के जरिए पकड़े जाने के डर और रकम में हिस्सेदारी के चलते की गई। एसएसपी के मुताबिक अपहरण में इस्तेमाल मोबाइल और सिम मिल गए हैं।

अंत तक हार्दिक से संपर्क में रहे परिजन
हार्दिक को छुड़ाने के लिए फिरौती की रकम पर कई दौर सौदेबाजी चली। 50 लाख नहीं होने की बात कहने पर अपहरणकर्ता 40 लाख पर आ गए थे। परिजनों ने फिर भी असमर्थता जताई तो पहले 20 फिर 18 लाख रुपए पर बात पक्की हुई। पिता राहुल ने बैग में साढे़ 17 लाख रखे थे। रक म लेकर चलने से पहले पिता ने हार्दिक से बात की थी। तसल्ली के बाद नोटों से भरा बैग दिया गया था।

ठिकाने से 20 किमी दूर से करते थे कॉल
हार्दिक अपहरण के मास्टर माइंड दोनों भाइयों ने बड़े अपराधियों की तरह खूब दिमाग चलाया था। पुलिस की पहुंच से बचने के लिए वे लिसाढ़ स्थित ठिकाने से 15 से 20 किमी दूर जाकर परिजनों को कॉल करते थे। पहले दिन उन्होंने रुड़की आकर फोन किया था। 36 घंटे के अंदर किडनैपर्स ने फिरौती की सौदेबाजी से लेकर रकम हासिल करने तक करीब 11 कॉल किए थे। उन्हें भनक भी नहीं थी कि पुलिस उनकी हर कॉल की राजदार बनी हुई थी।

ऋषिकेश से अगवा करने के बाद हार्दिक को अपहरणकर्ता बृहस्पतिवार को सीधे शामली के लिसाढ़ गांव में अपने घर ले गए थे। शुक्रवार सुबह रोहित और मोहित ने रुड़की लौटकर हार्दिक के फोन से 50 लाख रुपए की फिरौती मांगी थी। इसके बाद हार्दिक का फोन वहीं बंद कर दिया। लिसाढ़ लौटने के बाद आरोपियों ने फर्जी आईडी पर दो सिम कार्ड लिए। इसके बाद हार्दिक के परिजनों से सौदेबाजी शुरू की गई।
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परिजनों ने हार्दिक से बात कराने को कहा तो रविवार देर रात दोनों भाई हार्दिक को नशे में धुत्त कर बाइक से मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना जंगल ले गए। यहां रात करीब साढ़े बारह बजे हार्दिक की पिता राहुल से फोन पर बात कराई। रात के अंधेरे में आरोपी हार्दिक को लेकर लिसाढ़ लौट आए। सोमवार को लगातार दोनों फोन पर पिता राहुल को दिशा-निर्देश देते रहे। सूत्रों की माने तो फर्जी आईडी वाले सिमों से अपहरणकर्ताओं ने परिजनों को कुल 11 बार कॉल की।
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