पिरान कलियर के इमलीखेड़ा गांव में रविवार की रात हथियारबंद कच्छा बनियानधारी लुटेरों ने पीआरडी के जवान समेत तीन परिवारों को बंधक बनाया।
उन्हें पीटा और नगदी व जेवर आदि लूट कर फरार हो गए। दस वर्षीय किशोर के अपहरण का भी प्रयास किया। पुलिस लुटेरों की तलाश में कांबिंग की, लेकिन सफलता नहीं मिलीं।
शनिवार रात करीब एक बजे पांच-छह बदमाश हाथों में लाठियां लेकर इमलीखेड़ा निवासी कुर्बान के घर में घुस आए।
यहां कुर्बान और उसका भाई इकराम परिवार के साथ रहते हैं। दोनों परिवार बरामदे में ही सो रहे थे।
बेटे के अपहरण का भी प्रयास किया
बदमाश कमरे में घुसकर संदूक का ताला तोड़ने लगे। आवाज सुनकर कुर्बान, उसका बेटा साबिर, भाई इकराम और उसकी पत्नी असगरी की आंख खुल गई। बदमाशों ने उन्हें बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया।
कुर्बान के बेटे साबिर का अपहरण का भी प्रयास किया, लेकिन परिवार के आग्रह करने पर उसे छोड़ दिया।
इसके बाद लुटेरे पड़ोस में ही रहने वाले पीआरडी के जवान ब्रह्मपाल सिंह के घर में घुस गए। ब्रह्मपाल और बेटी पूजा को आतंकित कर उसकी पत्नी अनीता का बेल्ट से गला दबाकर कानों से सोने के कुंडल निकाल लिए।
अलमारी में रखे तीन हजार रुपए और अन्य सामान उठाकर बदमाश वहां से भाग निकले।
शोर मचाने पर आये लोग
बदमाशों के जाने के बाद शोर मचाने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां जमा हो गए।
ग्राम प्रधान जुल्फिकार की सूचना पर एसपी देहात अजय सिंह, सीओ स्वतंत्र कुमार और आसपास के थानों की पुलिस मौके पर पहुंची।
सुबह तक पुलिस और ग्रामीण लुटेरों की तलाश में कांबिंग करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिलीं।
एसपी देहात अजय सिंह ने बताया कि लुटेरों की तलाश की जा रही है। घायल कुर्बान और असगरी को अस्पताल में भर्ती कराया है।
कई संदिग्धों को हिरासत में लिया
इमलीखेड़ा गांव में हुई लूट के बाद पुलिस ने पिरान कलियर में कई स्थानों पर छापे मारे।
इस दौरान आठ-दस संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों से पुलिस पूछताछ कर रही है।
जूते चप्पल भी ले गए लुटेरे
पीआरडी के जवान ब्रह्मपाल सिंह के अनुसार लुटेरों ने उसके घर की तलाशी ली। अलमारी में रखे पैसे और अन्य सामान तो उठाया ही साथ ही दरवाजे के बाहर रखे उनके जूते-चप्पल भी बोरे में भरकर ले गए।
वर्दी ने बचाई जान
ब्रह्मपाल सिंह और उसके परिजनों के लिए पीआरडी की खाकी वर्दी वरदान बन गई।
घर में तलाशी के दौरान लुटेरों ने खूंटी पर खाकी वर्दी टंगी देखी तो ब्रह्मपाल को पुलिसवाला समझकर पहले तो उससे सरकारी पिस्टल मांगने लगे, पिस्टल नहीं होने की बात कही तो इसके बाद लुटेरे वहां से चले गए।
ब्रह्मपाल और उसके परिजनों का कहना है कि शायद वर्दी न होती तो लुटेरे उनके साथ भी मारपीट करते।