नैनीताल जिले के रामनगर में 2010 में वहशी जीजा द्वारा की गई साली की दर्दनाक हत्या में आरोपी जीजा को सजा मिल गई है।
प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह की अदालत से वर्ष 2010 में रामनगर में हुई युवती की हत्या के मामले में आरोपी जीजा को आजीवन कारावास और 15500 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सुनवाई में अभियोजन पक्ष ओर से एडीजीसी घनश्याम पंत ने नौ गवाह पेश किए।
अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय को बताया गया कि 7 जून 2010 को गुरुदेव सिंह पीरूमदारा स्थित अपने खेत में पानी लगाने गए थे। उन्होंने वहां एक जली हुई महिला का शव देखा। सूचना के बाद रामनगर पुलिस भी मौके पर पहुंची। जहां मृतका के भाई संजय सिंह ने उसकी पहचान अपनी बहन लक्ष्मी के रूप में की।
संजय की ओर से रामनगर थाने में दी गई तहरीर में कहा है कि उसकी बहन यहां पीरूमदारा खाटपुर कॉलोनी रामनगर निवासी अपनी दीदी मोनिका और जीजा हरबंश के साथ रहती थी और लक्ष्मी डेल्टा फैक्ट्री काशीपुर में कार्य करती थी।
खून से सने कपड़ों में देखा गया था आरोपी
संजय के मुताबिक घटना के दिन वह भाई की शादी में जाने के लिए बहन मोनिका को लेने आया था। रात में उसने जीजा को खून से सने कपड़ों में देखे जाने की बात भी कही।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 201, 411, 394 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना एसआई प्रमोद दानू ने की। पूछताछ में आरोपी ने साली के साथ शारीरिक संबंध के बाद हत्या करना कबूला। जिसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हथियार (दरांती) भी बरामद किया।
न्यायालय में हुई सुनवाई में आरोपी की पत्नी ने भी अपने पति के खिलाफ गवाही दी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने आरोपी को आईपीसी की धारा 302 में आजीवन कारावास व 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई।
इसके अलावा धारा 201 में सात साल की सजा व पांच हजार रुपए जुर्माना, धारा 411 में एक वर्ष की सजा व 500 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। जबकि 394 में उन्हें दोषमुक्त करार दिया।