उत्तराखंड के कुख्यात वन्यजीव तस्कर भीमा को उत्तराखंड वन विभाग की टीम ने हरियाणा के गुड़गांव से गिरफ्तार किया है।
लैंसडौन वन प्रभाग की टीम ने उसकी निशानदेही पर विभागीय कर्मियों ने कोटड़ी के जंगल से एक खटका भी बरामद किया है।
पूछताछ के बाद वन विभाग ने उसे कोटद्वार न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में पौड़ी जेल भेज दिया है।
पुलिस की गिरफ्त से हुआ था फरार
भीमा को 16 मई को अपने चार अन्य साथियों के साथ कोटड़ी के जंगल में पुलिस की गिरफ्त से फरार हो गया था। तभी से वह वांछित चल रहा था।
लैंसडौन के डीएफओ नितिशमणि त्रिपाठी ने बताया कि वन विभाग की टीम 17 मई से ही भीमा और उसके साथियों की तलाश में जुटी थी।
भीमा की गिरफ्तारी के लिए वन विभाग वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्लूसीसीबी) नई दिल्ली से लगातार संपर्क में था।
राजस्थान निकलने की तैयारी में था भीमा
वन विभाग की टीम गुड़गांव के सूरतनगर फेज-टू स्थित आवास पर लगातार नजर रख रही थी। उसे उसके आवास के पास से दबोच लिया गया। बताया कि अगले दिन ही भीमा राजस्थान निकलने की तैयारी कर चुका था।
डीएफओ ने बताया कि वन विभाग की टीम रातोंरात उसे लेकर यहां पहुंची और मंगलवार सुबह उसकी निशानदेही पर कोटड़ी रेंज के कंपार्टमेंट नंबर पांच-बी से खड़का बरामद कर लिया गया।
डीएफओ ने बताया कि पूछताछ में उसने कुछ अहम जानकारी दी है। उसके अन्य साथियों को भी तलाशा जा रहा है।
भीमा पर कई राज्यों में दर्ज हैं मुकदमें
डीएफओ ने बताया कि 16 मई को भीमा के दो साथियों रामा और किशोर को वन विभाग दबोचने में कामयाब हुआ था। उनसे बड़ी संख्या में राशन, दो खड़के, दो चेन भी बरामद किया गया था।
तब भीमा और उसके चार अन्य साथी फरार हो गए थे। उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत नामजद मुकदमा कायम किया गया था।
प्रोफेशल अपराधी है भीमा
डीएफओ के अनुसार भीमा एक शातिर और प्रोफेशनल अपराधी है, जिसके खिलाफ गुड़गांव, बिजनौर और फरीदाबाद में भी मुकदमें दर्ज हैं।
इन दिनों वह जमानत पर चल रहा था और मई दूसरे हफ्ते लाव-लश्कर के साथ बाघ के शिकार के इरादे से कोटड़ी के जंगल पहुंचा था। राशन जब्त होने से उसकी कमर टूट गई थी।