IIT रुड़की के डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेक्नोलोजी में प्रोफेसर विकास परुथी आय से अधिक संपत्ति और फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में फंसे हैं।
सीबीआई ने फर्जी प्रमाणपत्र के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है, जबकि संपत्ति मामले में प्राथमिक जांच (पीआई) दर्ज की गई है। मामले में जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी। इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय, दिल्ली और आईआईटी रुड़की को जानकारी भेजी गई है।
संपत्तियों की भी चल रही जांच
डॉ. परुथी जनवरी, 2000 से यहां कार्यरत है। सीबीआई जांच के दौरान उनके नाम कई संपत्तियां सामने आई और बैंक एकाउंट में खासी रकम जमा पाई गई थी। इसी दौरान खुलासा हुआ कि नौकरी के लिए डॉ. परुथी की ओर से लगाया गया जाति प्रमाणपत्र भी फर्जी है।
सर्टिफिकेट गाजियाबाद के तहसीलदार की ओर से जारी किया गया था लेकिन संबंधित लेखपाल ने रिपोर्ट दी थी, कि इस नाम का व्यक्ति वहां का निवासी नहीं है।
यह जानकारी गाजियाबाद के तहसीलदार ने आईआईटी रुड़की के कुलसचिव एके श्रीवास्तव को भेजी है। मामला देहरादून परिक्षेत्र का था, इसलिए अब दोनों आरोपों की जांच सीबीआई देहरादून को सौंपी गई है।
आईआईटी प्रशासन का कहना
मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ली है। उसकी जांच का निर्णय मिलने या फिर सीबीआई की ओर से कोई आदेश जारी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-प्रशांत गर्ग, उपकुलसचिव प्रशासन, आईआईटी रुड़की।