पुलिस और आबकारी विभाग की आंखों में धूल झोंककर शराब माफिया ने गौजाजाली में सेनेटरी सामान के गोदाम को शराब का गोदाम बना दिया। शिकायत पर आबकारी विभाग की टीम ने छापा मारा तो अंग्रेजी और देसी शराब की साढ़े पांच हजार बोतलें बरामद हुईं। पकड़ी गई शराब की कीमत दो करोड़ 35 लाख रुपये आंकी जा रही है।
तस्कर तो हाथ नहीं लगे मगर गोदाम के चौकीदार को हिरासत में लिया गया है। चर्चा है कि शराब के इस जखीरे और सप्लाई से जुड़ा व्यक्ति प्रदेश के एक कद्दावर नेता का खासमखास है। प्रदेश में अवैध शराब की यह सबसे बड़ी बरामदगी बताई जा रही है।
यहां से अलग-अलग इलाकों को सप्लाई होती थी शराब
जिला आबकारी अधिकारी पवन सिंह के अनुसार उन्हें सूचना मिली थी कि बरेली रोड पर गौजाजाली स्थित सेनेटरी के सामान के गोदाम में शराब छिपाकर रखी है और यहां से अलग-अलग इलाकों को सप्लाई होती है।
आबकारी निरीक्षक महेंद्र सिंह बिष्ट की अगुवाई में टीम ने गोदाम में छापा मारा तो अंदर शराब की हजारों पेटियां देखकर दंग रह गए। गोदाम में मैकडावल की 2500 और देसी शराब (दबंग और गुलाब ब्रांड) की 3000 पेटियां रखी गई थीं। गोदाम में सेनेटरी का सामान, टंकी टाइल्स आदि भी पड़ा मिला।
टीम ने मौके से चौकीदार जवाहर को हिरासत में ले लिया। निरीक्षक महेंद्र बिष्ट ने बताया कि होलोग्राम देखने से पता चला है कि बरामद शराब एक साल पुरानी है। वर्तमान समय में ट्रैक एंड ट्रेस पद्धति से शराब एलाट की जाती है। गोदाम से ट्रकों से शराब आबकारी कार्यालय भेजी गई। आबकारी विभाग के उपायुक्त प्रदीप कुमार ने बताया कि यह प्रदेश की सबसे बड़ी बरामदगी है। जल्द तस्करों को भी पकड़ लिया जाएगा।
गोदाम के अंदर से बनाया था रास्ता
तस्कर ने गोदाम के अंदर से माल पार करने के लिए बड़ा होल बनाया था। इसी रास्ते से पेटियां दूसरे मकान से अंदर ही अंदर पार हो जाती थी। इस रास्ते से पेटी लेकर एक व्यक्ति आराम से निकल सकता था। उसे गोदाम का गेट खोलने की जरूरत नहीं पड़ती।
चौकीदार ने बताया खुद को बेकसूर
मूल रूप से फतेहपुर (यूपी) के खागा गांव का रहने वाले चौकीदार जवाहर ने कहा कि वह 45 साल से यहां रह रहा है। वह सेनेटरी के व्यवसायी जय सिंह के फर्म के सामानों की रखवाली करता है। उसका शराब से कोई मतलब नहीं है। सेनेटरी का सामान यहां से शहर स्थित दुकान में जाता है। कुछ दिनों पहले तारा नामक मुंशी गोदाम में ड्यूटी करता था।
इस टीम ने मारा छापा
गोदाम में छापा मारने वाली टीम में निरीक्षक महेंद्र सिंह बिष्ट, प्रवर्तन दल के सोनू सिंह, पूरन जोशी, उपनिरीक्षक मोहन सिंह कोरंगा, इंद्र सिंह राणा, पान सिंह जीना, पान सिंह तड़ागी, विजेंद्र जीना, संतोष लोहनी, रेनू सिंह, राकेश, महेंद्र लोहनी, डीके आदि शामिल रहे।