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चोरी के इस हाईटेक तरीके को पढ़ दंग रह जाएंगे आप

Sun, 13 Jul 2014 08:26 AM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
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नई पीढ़ी के चोर पूरे आधुनिक हो गए हैं। महंगे कपड़े, ब्रांडेड जूते और काला चश्मा पहनकर महंगी कारों में चलते हैं। पॉश कालोनियों में घूमकर शिकार की तलाश करते हैं। मौका मिलते ही वारदात को अंजाम दे देते हैं।
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रात होने का इंतजार नहीं करते हैं। चोरी करने वालों का पहनावा और चाल-ढाल ऐसी होती है कि शिकार बनने वाले के पड़ोसी समझते हैं कि कोई मेहमान आया है।

इनका चोरी का कोई निश्चित ठिकाना नहीं होता। जहां गए, वहीं शिकार तलाश लिया। एक शहर में ताबड़तोड़ वारदात करके दूसरे शहर चले जाते हैं और पुलिस देखती रह जाती है। पुराने चोरों पर गाहे-बगाहे मुकदमे लादकर पुलिस भी अपनी पीठ थपथपा लेती है।

चोरी की कहानी, चोर की जुबानी

चोरी की कई घटनाओं में शामिल रहे एक शख्स ने बताया कि अब चोरियां चट मंगन-पट ब्याह की तर्ज पर की जाती हैं।

लोकल गैंग के अपने तरीके हैं, लेकिन घुमक्कड़ चोरों के गिरोह को मुखबिरी की जरूरत नहीं होती है। अब चोरों के निशाने पर बड़े शहर और आलीशान मकान रहते हैं।

वारदात करने के लिए रात का इंतजार नहीं किया जाता है। दिन में ही चोरी करने में ज्यादा दिलचस्पी ली जाती है।

अक्सर एक कार में तीन से चार लोग चलते हैं। इनमें से एक चोरी का एक्सपर्ट होता है, जो लोहे के सरिये से ताले तोड़ने और कुंडा उखाड़ने में माहिर होता है। पॉश कालोनियों में कार में घूमकर रेकी की जाती है।

मकान की गतिविधि और हलचल पर नजर

खासतौर से दोपहर के समय, क्योंकि इस समय कालोनियों में आवाजाही कम होती है। अमूमन हर कालोनी में किसी न किसी घर के बाहर ताला लटका मिल जाता है।

ऐसे में कुछ देर कार में बैठकर आसपास के माहौल को परखा जाता है। खासतौर से ताले लगे मकान के सामने और आसपास वाले मकान की गतिविधि और हलचल पर नजर रखी जाती है। यदि रिस्क लगता है तो आगे बढ़ जाते हैं।

अन्यथा एक या दो लोग मकान के अंदर प्रवेश कर 15 से 20 मिनट में माल साफ कर देते हैं। अन्य साथी घटनास्थल के इर्दगिर्द ही कार खड़ी करके उसमें से ही माहौल का जायजा लेते रहते हैं।

संदेह होने पर साथी को एसएमएस करके अलर्ट कर देते हैं। यदि एक वारदात में अच्छा माल मिल जाता है तो दूसरे शहर की तरफ निकल जाते हैं। कम माल मिलता है तो दूसरे मकानों की तलाश की जाती है।
(जिस शख्स ने यह बात बताई वह अब चोरी की वारदात से तौबा करने का दावा करता है।)
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दून की कई चोरियों में बाहरी गैंग!

दिल्ली से लेकर वेस्ट यूपी के अनगिनत गिरोह देहरादून और प्रदेश के दूसरे हिस्सों में सक्रिय हैं। एक दर्जन के करीब गैंग पुलिस पकड़ चुकी है। शहर में हो रही चोरी की वारदात में पुलिस को कुछ ऐसे ही संकेत मिले हैं। एसएसपी अजय रौतेला का कहना है कि इस एंगल पर काम चल रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही गिरोह पर शिकंजा कस जाएगा।

पुराने खलीफा से दो कदम आगे
नई पीढ़ी के चोर चोरी के पुराने खलीफा से दो कदम आगे हैं। उनके तौर-तरीके बदल गए हैं। पहले छत फाड़कर चोरी होती थी। हालांकि चोरी के मामले में पहले खानाबदोश पारदी जाति के सक्रिय चोर शातिर माने जाते थे, जो डेरे बनाकर रहते थे। दिन में रेकी करने के बाद रात में वारदात करते थे। पंछी बिरादरी भी कुछ लोगों की करतूत की वजह से बदनाम थी। यह लोग तो साथ में परिजनों को बेहोश करने की दवा लेकर चलते थे।

बाहर ताला लटकाने से बचें
मकान के बाहरी दरवाजे पर ताला लगाना खतरे से खाली नहीं होता है। बीस दिन में दर्जनों चोरी की घटनाएं उन्हीं घरों में हुई हैं, जिन घरों में बाहर से ताले लटके थे। कालोनी में भ्रमण के दौरान ताला देकर चोरों का दिमाग काम करने लग जाता है। ऐसे में जरूरी है कि घरों में इंटर लॉक लगाएं।

(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-rakeshk@mrt.amarujala.com और इस नंबर- 9675501486 पर संपर्क कर सकते हैं।)
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