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‘सुखी चुप नहीं हुई तो मामा ने काट दिया गला’

Mon, 27 Oct 2014 09:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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चौहरे हत्याकांड एकमात्र चश्मदीद सात साल के मासूम कंवलजीत सिंह ने सोमवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय छवि बंसल की अदालत में मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज कराए। उसने अदालत में हरमीत की खौफनाक करतूत बयां की।
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सोमवार को अदालत पहुंचे कंवलजीत ने बताया,‘सुखी और मैं मां के साथ सोए थे। रात को नाना, नानी और फिर मां के चिल्लाने की आवाजें सुनकर मैं उठ गया। सुखी भी जाग गई थी।

बगल में सोई मां खून से तर थी और बिस्तर के सामने मामा चाकू लेकर खड़ा था। मैं सहम गया। मामा ने मुझे भी चाकू मारा तो मैं भागकर सोफे के पीछे छुप गया। सुखी मामा को देखकर रोने लगी।
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मामा ने उसे चुप रहने का इशारा किया, लेकिन वह रोती रही। काफी देर तक भी वह चुप नहीं हुई तो मामा ने मेरे सामने ही उसका गला रेत दिया। मामा ने मुझे चाकू दिखाकर कहा, अब तूने कुछ बोला तो तेरा भी यही हाल करूंगा।’
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खौफजदा है कंवलजीत

कंवलजीत अपने पिता अरविंदर सिंह के साथ अदालत पहुंचा था। अरविंदर ने बताया कि आंखों के सामने पूरे परिवार का कत्ल देखने के बाद कंवलजीत खौफजदा है।

मासूम मन पर इतना गहरा असर पड़ा है कि उसे हर वक्त आंखों के आगे हरमीत का भयानक चेहरा नजर आता है। बताया कि दो दिन पूर्व परिजनों के अंतिम संस्कार के बाद लौटते वक्त कंवलजीत अचानक रोने लगा। वह बार-बार कहता रहा कि मामा फिर आ जाएगा। अरविंदर ने बताया कि अब वह एक पल भी उसे अकेला नहीं छोड़ रहे।

मैं होता तो शायद बचा लेता
अरविंदर उस पल को कोसते रहे जब उन्होंने बिजनेस के चलते देहरादून आने का प्रोग्राम ऐन वक्त पर कैंसल कर दिया था। बेटे कंवलजीत का हाथ थामे अरविंदर ने कहा कि अगर मैं भी यहां होता तो शायद हरमीत से परिवार को बचा लेता। आंखों में आंसू लिए अरविंदर ने बताया कि पत्नी हरजीत इंजेक्शन लगाने से भी डरती थी। इसीलिए वह डॉक्टर के पास जाने से भी कतराती थी। लेकिन हरमीत ने बेरहमी से उसकी अंगुलियां काट दीं। उसकी छाती पर चाकू से गहरे वार कर डाले।
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