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और उसने कर दिया पूरे परिवार का कत्ल

Sun, 26 Oct 2014 12:07 PM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
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पिता, सौतेली मां और गर्भवती बहन समेत चार परिजनों का हत्यारोपी हरमीत सिंह अपनी मां (पिता जय सिंह की दूसरी पत्नी अनीता) से जुदाई को खुद के लिए बड़ी नाइंसाफी मानता था।
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अक्सर वह मां से अपना दर्द जाहिर कर अलगाव के फैसले को कोसता था। बचपन के दिन और मां की यादें कभी नहीं भुला सका। फोन से वह मां और छोटे भाई से हमेशा जुड़ा रहा। पुलिस पूछताछ में यह खुलासा किया है सहारनपुर में रहने वाली हरमीत की मां अनीता ने।

माता-पिता के बीच अलगाव के वक्त बच्चों पर पड़ने वाले कुप्रभाव से हरमीत सिंह भी अछूता नहीं रहा। 13 साल की उम्र तक उसे मां का प्यार मिला लेकिन नौ साल पहले कोर्ट के आदेश पर जब जयसिंह और अनीता अलग हुए तो उनके दोनों बेटों का भी बंटवारा हो गया।
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हरमीत को मां से दूर होकर जयसिंह के पास रहना पड़ा। हालांकि पिता के पास हरमीत को सारी सुख सुविधाएं मिलीं, लेकिन मां से जुदाई का दर्द नासूर बनता गया। उस पर धीरे-धीरे नकारात्मक सोच हावी होती गई।

अक्सर फोन पर मां से वह सौतेले व्यवहार की शिकायत करता था। कहता था कि आखिर अलग करने की सजा उसे क्यों दी गई? उसका कसूर क्या है?

दिवाली की रात हुई थी बातचीत

दिवाली की रात अनीता ने सहारनपुर से फोन कर हरमीत सिंह को दिवाली की शुभकामनाएं दी थी। छोटे भाई पारस और सौतेले बडे़ भाई हनी (अनीता के पहले पति का बेटा) से भी बात हुई थी।

पुलिस के मुताबिक अनीता का कहना है कि बातचीत के वक्त वह पूरी तरह से सामान्य था। अलबत्ता शिकायत वही पुरानी थी। उसने हनी को पानी में गिरने से खराब हुआ फोन भी ठीक कराने भेजा था। सहारनपुर में हनी मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाता है।

मैरिज ब्यूरो के जरिये मिले थे जयसिंह और अनीता
कारोबारी जयसिंह और सहारनपुर की अनीता की मुलाकात मैरिज ब्यूरो के माध्यम से हुई थी। ब्यूरो संचालक के यहां दोनों में नजदीकियां बढ़ी, फिर रिश्तों की डोर बंध गई। अनीता का पहले पति से नशे के चलते तलाक हो गया था। उससे एक बेटा था।

पुलिस सत्रों के मुताबिक वर्ष 1992 में हरिद्वार के एक गुरुद्वारे में जयसिंह और अनीता ने शादी की थी। जयसिंह ने सहारनपुर में अनीता को मकान लेकर दिया था। दो बच्चों के बाद दोनों में खटास बढ़ गई।

अनीता पत्नी के तौर पर दून में रहना चाहती थी, लेकिन पहली बीवी को सौतन मंजूर नहीं थी। मुकदमेबाजी में बच्चों के बंटवारे और पैसे देकर समझौता किया गया था।

कहां से आया 10 इंची रामपुरी चाकू?

देहरादून के आदर्श नगर हत्याकांड में रामपुरी चाकू इस्तेमाल किया गया था। करीब 10 इंच लंबा चाकू खटके के साथ खुलकर फोल्ड हो जाता है। चश्मदीद कंवलजीत ने भी यही चाकू पहचाना है।

इस पर खून भी लगा है। इसमें धार लगवाने हरमीत पलटन बाजार गया था। लेकिन उसके पास चाकू आया कहां से, इसका पता पुलिस नहीं लगा सकी है।

उत्तर प्रदेश में रामपुरी चाकू प्रतिबंधित है, लेकिन ऑनलाइन खरीदारी के लिए कई वेबसाइट्स पर उपलब्ध है। हालांकि चोरी छिपे इसे उत्तराखंड में भी लाया जाता है।

पीएम में मिली 87 चोटें
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चारों शवों पर कुल 87 निशान मिले हैं। पंचनामे में 45 घाव/चोट चिन्हित की गई थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि शवों को किसी हथियार से गोदा गया है। उन्हीं के चलते मौत हुई है। जय सिंह और कुलवंत के शव पर 27-27 घाव हैं, जबकि हरजीत पर 23 और तीन साल की सुखमणि के शरीर पर 10 चोट पाई गई हैं।

गर्भ में था बेटा
भाई की हैवानियत की शिकार बनी हरजीत कौर के गर्भ में बेटा पल रहा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक यह गर्भ आठ और नौ माह के बीच का था, जो मेल था। इसी आधार पर पुलिस ने मुकदमे में धारा बढ़ा दी है।

खौफ से नहीं उबरा कंवलजीत
नाना, नानी, मां और बहन की लाश के बीच कातिल मामा हरमीत के साथ घंटों रहे सात वर्ष के कंवलजीत अब तक खौफजदा है। शनिवार को परिवार के साथ वह श्मशान घाट पर आया था। अपनों के बीच भी वह बेहद गुमसुम नजर आया।

करतूत अकेले की, मास्टर माइंड कोई और

अपने परिवार के हत्यारोपी हरमीत की करतूत पर परिजन और रिश्तेदारों को कोई शक नहीं है, लेकिन उन्हें आशंका है कि पूरे मामले के पीछे मास्टर माइंड कोई और है।

जय सिंह के भतीजे सरदार अजय सिंह के मुताबिक पूरा हत्याकांड अकेले हरमीत ने अंजाम दे सकता है, लेकिन उसे रिमोट कंट्रोल की तरह ऑपरेट किया गया। पुलिस को गंभीरता से जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। वो शख्स कौन है, उसके चेहरे से नकाब उठना चाहिए। अजय सिंह दो टूक कहते हैं कि सजा से बचने के लिए हरमीत मानसिक बीमारी का सिर्फ ड्रामा कर रहा है।

हर मांग के साथ जिद्दी होता गया हरमीत
पिता जय सिंह अपने चिराग को दुनिया भर की खुशियां देना चाहते थे। मगर हर डिमांड पूरी होने के साथ वह जिद्दी होता गया। सातवीं में फेल होने के बाद हरमीत ने पलटकर स्कूल की तरफ नहीं देखा।

पिता ने एडवरटाइजर्स के पुराने कारोबार से जोड़ा, लेकिन उसने बिल्कुल रुचि नहीं दिखाई। फिर एक दुकान खुलवाई, वह भी बंद हो गई। इसी बीच शराब, स्मैक और फिर भांग ने हरमीत की जिंदगी बर्बाद कर दी।

नशा छुड़ाने के लिए पिता जय सिंह ने एक सेंटर में भर्ती कराया। यहां भी नाकामी हाथ लगी। सौतेली मां के साथ नाते-रिश्तेदारों में हरमीत की इमेज इतनी खराब थी कि कोई भी उससे मतलब नहीं रखता था। अपने कमरे तक जाने के लिए वह गैलरी इस्तेमाल करता था।
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महिला मित्र को रुपए देने पर पड़ी थी डांट

एक महिला मित्र को रुपए देने को लेकर हरमीत को पिता जय सिंह ने फटकार लगाई थी। सूत्रों के अनुसार हरमीत की पलटन बाजार में काम करने वाली एक युवती से दोस्ती है। वह उसे काफी रकम दे चुका था। पिता को पता लगा तो उन्होंने हरमीत कड़ी नसीहत दी थी।

पुलिस मानती है मानसिक बीमार
अब तक की जांच में पुलिस हत्यारोपी हरमीत सिंह को मानसिक रूप से बीमार मानकर चल रही है। एसपी सिटी अजय सिंह ने बताया कि हरमीत से बातचीत के अलावा परिचितों से भी इस बात को बल मिला है।

भूत-आत्मा की बात करने के कारण परिजन उसे बालाजी ले गए थे। खुद को कमरे में बंद करने लेने की वजह से घर में दरवाजे की चटखनी भी हटा दी गई थी। उसके कातिल होने में शक नहीं है। फिंगर और फुट प्रिंट से भी इसकी पुष्ट हो गई है।

हत्यारोपी मनोरोगी नहीं हो सकता
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. नंदकिशोर के मुताबिक जिस तरह जघन्य हत्याकांड अंजाम दिया गया है, वह सुनियोजित साजिश का परिणाम है। हर कदम सोच समझकर उठाया गया है। ऐसे में हत्यारोपी मनोरोगी नहीं हो सकता है।

अकेलापन, नशा और कुछ खोने के डर से उपजी कुंठा वजह हो सकती है। शराब मनुष्य में अपराध प्रवृत्ति 60 से 120 गुना बढ़ा देती है। इस उम्र में भूलने की बीमारी भी तर्कसंगत नहीं है।’
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