kidney racket expose in gangotri charitable hospital
देश के अधिकांश हिस्सों में किडनी की खरीद-फरोख्त में आतंक का पर्याय बना डॉ.अमित ही देहरादून के किडनी कांड का मास्टर माइंड तो नहीं है। गंगोत्री चैरिटेबिल अस्पताल के किडनी की खरीद-फरोख्त के मामले में डॉ.अमित रावल का नाम आने के बाद इस आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। डॉ.अमित पहले भी कई राज्यों में नाम बदलकर लोगों की किडनी निकाल चुका है। पुलिस विवेचना में ही यह बात साफ हो पाएगी कि फरार अमित रावल आखिर कौन है।
किडनी चोरी या खरीद-फरोख्त की घटनाओं पर नजर डाली जाए तो सिर्फ एक ही नाम सामने आ रहा है, वो है डॉ.अमित। डॉ.अमित कई राज्यों में नाम बदलकर इस तरह के कामों को अंजाम दे चुका है। गुरुग्राम में वर्ष 2013 में सामने आए सबसे बड़े किडनी कांड का मास्टर भी डॉ.अमित नाम का शख्स ही था। 600 के करीब किडनी चोरी करने वाले डॉ.अमित का जाल 10 देशों तक फैला होने की बात उजागर हुई थी।
बरेली के रिक्शा चालक अकरम ने इसके बाद खुलासा किया था कि डॉ.अमित ने डॉ.संजय बनकर 1998 में उनकी किडनी निकाली थी। वर्ष 1993 में मुंबई में हुए किडनी कांड में भी डॉ.अमित नाम का शख्स ही शामिल रहा था। यहां अमित ने अपनी पहचान डॉ.संतोष के रूप में बनाई थी। जयपुर में भी डॉ.अमित नाम का ही शख्स किडनी की खरीद-फरोख्त का खेल कर चुका है।
अब देहरादून के गंगोत्री चैरिटेबिल अस्पताल में किडनी की खरीद-फरोख्त मामले में भी डॉ.अमित रावल का नाम आया है। पकड़े गए एजेंट जावेद ने डॉ.अमित को ही सरगना बताया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि डॉ.अमित रावल कहीं गुरुग्राम के किडनी कांड का मास्टर माइंड डॉ.अमित ही तो नहीं है। एसएसपी निवेदिता कुकरेती की मानें तो यह तो विवेचना में ही साफ हो पाएगा कि आखिर डॉ.अमित रावल कौन है, क्या इन सभी वारदातों में शामिल डॉ.अमित एक ही है।