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बनना चाहती थी जज, क्राइम सीरियल देखकर बन गई मुजरिम

Thu, 16 Jun 2016 02:48 PM IST
मेहताब आलम/ अमर उजाला, हरिद्वार
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- फोटो : concept photo
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हरिद्वार के डा. अनिल तोमर की हत्या में जनमेद की बेटी दुर्गेश सीधे तौर पर शामिल नहीं रही, मगर शव को कार में जलाने आइडिया उसी के शातिर दिमाग की उपज था।
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पुलिस के मुताबिक दुर्गेश ने शव ठिकाने लगाने का ये तरीका क्राइम सीरियल में देखा था। 12वीं जमात तक पढ़ी दुर्गेश यूं तो जज बनना चाहती थी, पर बाप के हाथ खून से रंगने पर उसे बचाने के लिए मुजरिम बन बैठी। पुलिस ने दुर्गेश पर सिर्फ हत्या के सुबूत मिटाने की धाराएं लगाई हैं।

डा. अनिल तोमर की हत्या में मौका ए वारदात पर कई सुराग पहले दिन ही गहरी साजिश की गवाही दे रहे थे। हत्या के बाद जिस शव जलकर जिस तरह कंकाल के रूप में बरामद हुआ था, उससे हत्या के पीछे प्रेम संबंध पुलिस मानकर चल रही थी।
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मगर पुलिस ने हत्या का पर्दाफाश कर जो कहानी बताई है, उससे पता चलता है कि जनमेद डा. अनिल से रंजिश तो जरूर रखता था पर हत्या अचानक झगड़े के दौरान हुई। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने में प्लानिंग जरूर की गई।

घर के पास देख गुस्से पर काबू नहीं कर पाया जनमेद

criminal - फोटो : amar ujala
पत्नी की मौत के बाद से जनमेद अपनी बेटी दुर्गेश के साथ हरिपुर कलां में रहता था। पुलिस के मुताबिक दुर्गेश से रिश्ता टूटने के बाद भी बेटी और अनिल तोमर की बातचीत होने के कारण उसकी डा. तोमर के बीच टशन चलती रहती थी। 

फौज और पुलिस में नौकरी कर चुका जनमेद घटना की रात करीब पौने दो बजे डाक्टर अनिल तोमर को घर के पास देख अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पाया। नौकर रविपाल ने भी उसका साथ दिया। मारपीट व गला दबाकर हत्या के बाद जनमेद ने अपनी बेटी दुर्गेश को बुलाया।

इसके बाद करीब एक घंटे तक तीनों मिलकर शव को ठिकाने लगाने की प्लानिंग करते रहे। दुर्गेश के कहने पर तीनों ने शव को दूर ले जाकर कार में ही जला देने का निर्णय लिया। कार में आग लगाकर सुबूत मिटाने के लिए उन्होंने बहादराबाद नहर पटरी का सुनसान रास्ता चुना, पर सीसीटीवी कैमरे से फुटेज के साथ साथ उनका गुनाह भी निकलकर बाहर आ गया।
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स्वामी भक्ति में जेल गया नौकर 

सफारी में मिली डॉक्टर की जली लाश - फोटो : file photo
ढाबा मालिक जनमेद के साथ डा. अनिल तोमर की हत्या कर नौकर रविपाल ने सिर्फ स्वामी भक्ति ही नहीं निभाई, इसके पीछे कई और चर्चाएं भी निकलकर सामने आई।

रायवाला की प्रतीकनगर कालोनी निवासी रविपाल जनमेद का विश्वसनीय नौकर था। ढाबा बंद होने के बाद वह रात में जनमेद के घर में ही सोता था। 

कहीं बेटी को बचा तो नहीं रहा जनमेद
खुलासे के दौरान जनमेद ने मीडिया के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं उसने हत्याकांड को लेकर बेटी दुर्गेश से बात कराने से भी मना किया।

नौकर ने मीडिया कर्मियों को कुछ जवाब जरूर दिए। खुलासे के दौरान जनमेद के चेहरे पर इस बात को लेकर शिकन दिखाई दी कि जिस बेटी के कारण डा. अनिल की हत्या की, उस बेटी को भी साथ में जेल जाना पड़ा।
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