डेढ़ वर्ष पूर्व हुई फरीदाबाद निवासी दीपक की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। लखनऊ की फोरेंसिक लैब से आई विसरा रिपोर्ट में युवक की मौत जहरीले पदार्थ के सेवन से होने की पुष्टि हुई है।
मृतक के पिता सुंदर ने अपने पुत्र के चार दोस्तों के खिलाफ जहर देकर मारने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है। बहादराबाद पुलिस घटना की जांच में जुट गई है।
फरीदाबाद के दयाल नगर, रोज गार्डन, सूरजपुर रोड निवासी सुंदर ने बहादराबाद थाने में मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया कि उनका 29 साल का पुत्र दीपक, वैशाली, दिल्ली के एक अस्पताल में काम करता था। बीते वर्ष अपने दोस्तों के साथ वह मसूरी घूमने आया था।
उपचार के दौरान मौत हो गई थी
यहां से वह दोस्तों के साथ 8 अप्रैल 2012 को यहां क्रिस्टल वर्ल्ड पहुंचा। क्रिस्टल वर्ल्ड में अचानक तबियत खराब होने पर दोस्त उसे लेकर रुड़की एक अस्पताल पहुंचे। जहां उपचार के दौरान दीपक की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण साफ नहीं होने पर पुलिस ने विसरा सुरक्षित रख लिया था। जिसे बाद में लखनऊ की फोरेंसिक लैब भेजा गया।
एसओ आरके सकलानी ने बताया कि विसरा रिपोर्ट में युवक के जहरीले पदार्थ का सेवन करने की पुष्टि हुई है। मृतक के पिता ने दोस्त मनीष, प्रिंयक, अमित गुप्ता और मयंक के पर जहरीला पदार्थ देकर पुत्र को मारने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है। एसओ के मुताबिक नामजद युवक दिल्ली के अलग अलग क्षेत्र के रहने वाले हैं। पुलिस उनके पते तलाश रही है।
डेढ़ साल बाद मिली कामयाबी, अब शुरू होगी लड़ाई
बेटे को न्याय की आस में बुजुर्ग सुंदर डेढ़ साल से लड़ाई लड़ रहे हैं। विसरा रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट होने के बाद उन्हें मुकदमा दर्ज करने के लिए पुलिस ने उनसे खूब चक्कर कटवाए। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज हो सका। अब बेटे के दोस्तों को सजा दिलाना ही उनके जीवन का लक्ष्य है।
निजी फर्म में काम करने वाले सुंदर ने अमर उजाला को फोन पर बताया कि बेटे का शव जब अंतिम संस्कार के लिए पुलिस ने उनके सुपुर्द किया था, तब उसे होठ, नाखून और उंगलियां नीली पड़ गई थीं। यहीं से उन्हें शक हुआ था।
हार नहीं मानी
तब पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के कारणों की पुष्टि न होने पर पल्ला झाड़ लिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। जांच के लिए विसरा लखनऊ भेजे जाने के बाद से वे समय समय पर यहां आकर बहादराबाद पुलिस से जांच रिपोर्ट आने की बाबत पूछते रहे।
नवंबर 2013 में जब रिपोर्ट आई, तब भी बहादराबाद पुलिस ने उनकी नहीं सुनी। परेशान होकर उन्होंने एसएसपी दफ्तर के चक्कर काटे। मुकदमा दर्ज कराने के लिए एक वकील की भी मदद ली। आखिरकार पुलिस को मामला दर्ज करना पड़ा। उन्होंने बताया कि अब उनकी लड़ाई शुरू हुई है। उनका मकसद बेटे के गुनहगारों को सजा दिलाना है।