तिहाड जेल नाइजीरियन फ्रॉड की बड़ी पाठशाला बन गई है। जेल के अंदर से ही मास्टर माइंड लाखों-करोड़ों कमाने का पाठ पढ़ाकर बाहर भेज रहे हैं।
दिल्ली पुलिस का निलंबित सिपाही भी उसी पाठशाला से होकर निकला है। नेटवर्क से जुड़ा एक बड़ा नटवरलाल फिलहाल जमानत पर बाहर है। उसके हाथ आने के बाद कई बडे़ राज खुलने की उम्मीद हैं। सवा करोड़ के नाइजीरियन फ्रॉड में पकड़े गए दिल्ली पुलिस के निलंबित सिपाही के मुंह से कई कड़वे सच सामने आए हैं।
नोएडा में गिरफ्तारी दर्शाने के कारण एसटीएफ को अभी उससे ज्यादा पूछताछ करने का मौका नहीं मिला है। यही वजह है कि रिमांड पर लेकर निलंबित सिपाही के हलक से बहुत कुछ बाहर निकालना है। एसटीएफ सूत्रों की माने तो दिल्ली पुलिस के इस निलंबित सिपाही नाइजीरियन फ्रॉड की एबीसीडी तिहाड जेल से ही सीखी थी।
दोस्ती में बना कानून का मुजरिम
एक दोस्त के जरिए नाइजीरियन के संपर्क में आए निलंबित सिपाही को यह राह काफी रास आई। फर्जी कागजातों के आधार पर काफी खाते खुलवाकर मोटी रकम डकारी है। उदाहरण के तौर पर यदि फ्राड के जरिए 20 लाख रुपए आए है, तो 10 प्रतिशत कमीश्न के हिसाब से दो लाख रुपए काटकर रकम शिकारी को सुपुर्द कर दी जाती है।
नीरज कुमार आनंद के अलावा एक दर्जन के करीब ऐसे नाम एसटीएफ के पास आए है, जो नाइजीरियन के हाथों में खेल रहे हैं। इन लोगों द्वारा कोलकाता, लखनऊ, मथुरा, आगरा और दिल्ली में दूसरे जाली खाते खुलवाए गए हैं।
दून के एसटीएफ द्वारा पकड़े गए निलंबित सिपाही नीरज कुमार आनंद के हवाले से एसएसपी सदानंद दाते ने बताया कि नाइजीरियन फ्रॉड से पहले नीरज का बचपन का दोस्त जुड़ा था। उसी दोस्त के इशारे पर इस रक्षक ने फ्रॉड के दल-दल में कदम रखा था। लालच के फेर में वह फंसता ही चला गया।
इस नेटवर्क में नाइजीरियन और कुछ भारतीय लोगों का गठजोड़ है। भारतीय जाली कागजातों के आधार पर बैंक खाता खुलवाकर एकाउंट नंबर नाइजीरियन को उपलब्ध कराते है। ओल्ड ऐज होम और पूंजी निवेश के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे उन खातों में धन स्थानांतरित कराते हैं। निलंबित सिपाही तिहाड जेल में ही नाइजीरियन के संपर्क में आया था।
- सदानंद दाते, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ