क्लीनिक की आड़ में नशे का धंधा करने वाले एक फर्जी डॉक्टर को देहरादून पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी पर एनडीपीएस एक्ट में केस दर्ज कर रिपोर्ट सीएमओ को भेज दी गई है।
डॉक्टर की डिग्री भी फर्जी
आरोपी की क्लीनिक से भारी मात्रा में प्रतिबंधित कैप्सूल, टैबलेट और इंजेक्शन मिले हैं। पुलिस ने क्लीनिक को सीज कर दिया है। करीब पांच साल से चल रहे क्लीनिक के डॉक्टर की डिग्री भी फर्जी है। पुलिस को शिकायत मिली थी कि चूना भट्टा रायपुर में क्लीनिक चलाने वाला डॉ. संजय शर्मा पुत्र जगदीश शर्मा निवासी नेहरू ग्राम नशे का धंधा करता है।
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पुलिस ने इसकी जांच-पड़ताल की तो आरोप सही पाए गए। रायपुर पुलिस ने बुधवार को शर्मा के क्लीनिक की तलाशी ली तो वहां से प्रतिबंधित कैप्सूल, टैबलेट और इंजेक्शन मिले। इन दवाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना बेचना प्रतिबंधित है।
शर्मा ने पुलिस से दावा किया था कि उसने यूपी के मुजफ्फरनगर से कम्यूनिटी मेडिकल सर्विस (सीएमएस) की डिग्री ली है। पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग से इसका सत्यापन कराया तो पता चला कि इस तरह की डिग्री पर क्लीनिक नहीं खोला जा सकता।
क्लीनिक से अर्जित संपत्ति जब्त
तलाशी के दौरान पुलिस को शर्मा के क्लीनिक से तीन बैंकों की पासबुक भी मिली है, जिनके खातों ढाई लाख रुपए जमा हैं। एसएसपी केवल खुराना ने बताया कि बैंक खाते सीज कर क्लीनिक से अर्जित संपत्ति जब्त की जाएगी।
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संजय के नेटवर्क से जुड़े बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी कर उन पर गैंगस्टर एक्ट लगाया जाएगा। एसएसपी ने कार्रवाई करने वाली पुलिस की टीम को ढाई हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
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दस का कैप्सूल सौ रुपए में
पुलिस ने बताया कि क्लीनिक संचालक सादे कागज पर डॉ. संजय शर्मा की मुहर लगाकर दवा लिखता था। मरहम-पट्टी और मामूली बीमारी के उपचार के लिए आने वाले लोगों की स्थिति देखकर पहले वह उन्हें नशे के कैप्सूल लिखता था।
मरीज के उसका आदी हो जाने पर दस रुपए के कैप्सूल का पत्ता सौ रुपए तक में बेचता था। क्लीनिक से बाहर भी वह नशे के कैप्सूल और इंजेक्शन सप्लाई करता था।