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सेना भर्ती रैली में सैनिक बनकर घूम रहा था जालसाज

Wed, 14 Oct 2015 01:37 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून में सेना भर्ती रैली स्थल पर सेना की वर्दी पहनकर कर घूम रहे एक फर्जी सैनिक को पकड़ा गया है।
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मिलिट्री इंटेलिजेंस कुछ दिनों से इस व्यक्ति पर नजर रखे थी। सेना को शक है कि आरोपी युवाओं को भर्ती का झांसा देकर सौदेबाजी कर रहा था, लेकिन फिलहाल कोई शिकायतकर्ता सामने नहीं आया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। गढ़ी कैंट के महेंद्रा ग्राउंड में आठ अक्तूबर से सेना की भर्ती चल रही है।

पहले दिन से आरोपी सेना की वर्दी और पुलिस की नीली टोपी लगाकर भर्ती में आने वाले युवकों को नियंत्रित करने में सेना और पुलिस का सहयोग कर रहा था। किसी को उस पर शक नहीं हुआ। मंगलवार को इंटेलिजेंस की सूचना पर एक सैन्य अधिकारी को जब शक हुआ तो उसे बुलाकर पूछताछ की।
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जरूरी जानकारी जुटाने के बाद आरोपी को कैंट कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। कोतवाली प्रभारी राजेश शाह ने बताया कि आरोपी का नाम पंकज सिंह रावत है, जो डोईवाला के बुल्लावाला का रहने वाला है। भर्ती के नाम पर वसूली के आरोप की जांच की जा रही है। आरोपी के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया गया है।

सपना पूरे करने की चाह ने भेजा जेल
पंकज सिंह रावत ने सेना भर्ती के लिए पांच बार प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हो पाया। पिछले साल अक्तूबर में उसने परिजनों से झूठ बोला कि वह सेना में भर्ती हो गया है। झूठ को छिपाने के लिए पंकज ने लैंसडोउन में मेडिकल होने का ड्रामा रचा।

परिजनों को उसने जयपुर में ट्रेनिंग का हवाला दिया, जबकि हरिद्वार के एक होटल में नौकरी करता रहा। पिता ने ट्रेनिंग अकादमी पर जाने की बात कही तो उन्हें गच्चा देता रहा। इस बार परिजनों को भर्ती रैली में ड्यूटी लगने का कारण बता घर पहुंच गया।

गोरखा रेजिमेंट्स के लिए नहीं मिल रहे लड़ाके
भारतीय सेना के सात गोरखा रेजिमेंट्स के लिए गोरखा लड़ाके नहीं मिल रहे हैं। गोरखाओं का सेना में बतौर जवान भर्ती होने का गिरता रुझान सेना के लिए चिंता का सबब बन गया है।

देश में देहरादून गोरखा भर्ती का सबसे बड़ा केंद्र है, लेकिन यहां लगातार संख्या गिर रही है। देश से बाहर नेपाल में गोरखा युवाओं की पहली पसंद ब्रिटिश आर्मी हो गई है, इस वजह से निर्धारित कोटे से कम जवान भारतीय सेना को मिल रहे हैं।

सेना की चिंता यह भी है कि जो गोरखा विश्वयुद्ध में ईस्ट एशिया से लेकर वेस्ट यूरोप तक नाप दिए थे उनकी आज की पीढ़ी एक मील का चक्कर काटने में हांफने लगी है। यह हालत तब है जब सेना गोरखाओं के लिए भर्ती में मानकों तक में रियायत बरत रही है। गोरखा राइफल्स में मौजूदा प्रावधान 60 प्रतिशत भारतीय गोरखा और 40 प्रतिशत नेपाल मूल के गोरखाओं को भर्ती करने का है।

भारतीय सेना में सात गोरखा रेजिमेंट्स में साठ से अधिक बटालियनों में 500 से अधिक युवा प्रतिवर्ष चाहिए। दोनों ही स्तर पर सेना को गोरखा जवान नहीं मिल रहे हैं। डेढ़ साल में तीसरी बार सबसे बड़े केंद्र दून में गोरखाओं के लिए बुधवार को भर्ती होगी। बीती दो रैलियों में 150 युवा ही मेडिकल तक पहुंच पाए थे।

इसमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है। भर्ती अधिकारी कर्नल बीएमएस तलवार ने बताया कि गोरखाओं की रिक्तियां अधिक हैं, जबकि भर्ती होने की संख्या कम है। हम गोरखाओं को सेना में आकर्षित करने के लिए गोरखा सामुदायिक संस्थाओं और सभाओं में प्रचार प्रसार कर रहे हैं, लेकिन संख्या नहीं बढ़ रही है। इस बार उम्मीद है कि संख्या बढ़ेगी।
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गोरखा भर्ती के तीन बड़े भर्ती केंद्र हैं देश में
देश में गोरखा भर्ती के तीन बड़े केंद्र हैं, जिसमें देहरादून, धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) और दार्जलिंग (पश्चिम बंगाल) से सर्वाधिक जवान मिलते हैं। एक बटालियन में औसतन 900 जवान होते हैं। इन बटालियनों के लिए प्रतिवर्ष 400 से 500 अधिक गोरखा जवानों की जरूरत होती है, लेकिन रिक्त पदों पर वर्ष में कई दौर की भर्ती के बाद पद नहीं भरे जा रहे।
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