उत्तराखंड प्रदेश के अल्मोड़ा जिले में अपनी ही बेटी पर बुरी नजर रखने वाले बाप को कोर्ट ने सजा सुना दी।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवींद्र मैठाणी ने नाबालिग पुत्री से दुराचार के प्रयास में पिता को आजीवन कारावास की आधी अवधि के बराबर कैद और 40 हजार रुपए का जुर्माने की सजा सुनाई है।
रानीखेत तहसील निवासी एक बाप ने 21 फरवरी 2015 को घर में अपनी 12 साल की पुत्री को अकेले पाकर दुराचार का प्रयास किया। उसके चीखने पर पड़ोसी मौके पर आ गए तो वह मासूम बच गई।
पिता के खिलाफ रानीखेत थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई और 22 फरवरी को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
पॉक्सो अधिनियम के तहत सुनाई गई सजा
यह मामला जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में चला। न्यायालय में धारा 376 (2), धारा (6) और 10, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) 2012 के तहत विशेष अभियोजक अरुण गौड़ ने नौ गवाह पेश किए।
इसके बाद न्यायालय ने पिता को दोषी पाते हुए धारा 376 (2) सपठित धारा 511 में आजीवन कारावास की आधी अवधि के बराबर कैद और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
धारा 10 और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो)-2012 में सात वर्ष कठोर कारावास और 20 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई गई। दोनों धाराओं में अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी को तीन-तीन माह की अतिरिक्त सजा भोगनी होगी। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।