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फर्जी पीसीएस अधिकारी बनकर अंजाम दी ऐसी घटनाएं जानकर सकते में आई पुलिस

Thu, 13 Dec 2018 10:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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पत्रकारों को जानकारी देते पुलिस अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
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फर्जी पीसीएस अधिकारी बनकर लोगों को ठगने वाले एक शातिर ठग को दून पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी ने खुद को कभी सचिवालय में श्रम विभाग, तो कभी आबकारी का सचिव बताकर कई लोगों से लाखों की ठगी की थी।

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इसके अलावा शहर के दर्जनों कारोबारियों को निशाना बनाया और उनसे ठेके व लाइसेंस के नाम पर लाखों रुपये ठगे। शक होनेे पर कुछ कारोबारियों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने बुधवार को आरोपी को राजपुर क्षेत्र से धर दबोचा। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। आरोपी मूल रूप से कानपुर का निवासी है।

जानकारी के मुताबिक भवानीपुर पोस्ट चंदक, बिजनौर निवासी ओमवीर सिंह ढाका देहरादून में रेस्टोरेंट चलाते हैं। कारोबार में उसके तीन और साथी भी हैं। कुछ दिन पहले ओमवीर की मुलाकात सुधांशु पांडेय नाम के व्यक्ति से हुई थी। पांडेय ने खुद को पीसीएस अधिकारी और श्रम विभाग में सचिव बताया। इसके बाद सुधांशु ने कहा कि वह श्रम विभाग में उन्हें ठेकेदारी का लाइसेंस दिला सकता है। सुधांशु की बातों में आकर ओमवीर ने ठेकेदारी का लाइसेंस दिलाने के लिए 20 हजार रुपये दे दिए। इसके बाद सुधांशु ने एक लाइसेंस (फर्जी) ओमवीर व उसके दोस्तों को दे दिया। 

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इसके बाद सुधांशु ने एक बड़ा ठेका दिलाने की बात कही और धरोहर राशि के लिए करीब दो लाख रुपये मांगे। इस पर ओमवीर आदि ने सुधांशु को दो किश्तों में 1.40 लाख और 56 हजार रुपये दे दिए। इसके एवज में सुधांशु ने कुछ दस्तावेज भी दिए, जिनकी श्रम विभाग में तस्दीक कराई तो वे फर्जी पाए गए।

इसके बाद भुक्तभोगियों ने पुलिस अधीक्षक नगर प्रदीप कुमार राय से शिकायत की। चूंकि, मामला राजपुर थाना क्षेत्र का था तो उन्होंने केस की जिम्मेदारी थानाध्यक्ष राजपुर अरविंद कुमार को सौंप दी। रणनीति के तहत ओमवीर आदि ने कुछ और पैसे देने के बहाने सुधांशु को बुधवार दोपहर राजपुर क्षेत्र के मसकन में बुलाया गया। सुधांशु के पहुंचने पर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। 

पुलिस अधीक्षक नगर प्रदीप कुमार राय ने बताया कि पूछताछ में आरोपी सुधांशु ने कई और मामलों में भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। आरोपी के पास से कई विभागों के फर्जी दस्तावेज, मुहर व अन्य अभिलेख बरामद हुए हैं। आरोपी ने शहर के करीब 10 कारोबारियों से लगभग 15 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी की है। आरोपी सुधांशु के शिकार हुए लोगों को बुलाया गया है, ताकि अन्य जानकारियां हासिल की जा सकें। सुधांशु ने एक बार पीसीएस की मुख्य परीक्षा भी पास की है। इसके अलावा उसने शहर के एक बड़े स्कूल में एक साल तक अध्यापन भी किया है। 
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ओमवीर के रिश्तेदार ने पकड़ी गलती 

ओमवीर ढाका का एक रिश्तेदार यदि बड़ा ठेकेदार न होता तो शातिर सुधांशु का यह खेल कभी पकड़ में नहीं आता। दरअसल, सुधांशु ने अपनी बात पर विश्वास दिलाने के लिए 34 करोड़ रुपये के ठेके के कागजात ओमवार को दिखाए थे। इसके बाद ओमवार ने कागजात अपने ठेकेदार रिश्तेदार के दिखाए।

कागजातों में केवल सुधांशु के ही हस्ताक्षर देखकर वे अचंभित हो गए और ओमवीर को बताया कि सचिव स्तर का पीसीएस अधिकारी इतना बड़ा ठेका जारी नहीं कर सकता है। यही नहीं जिस जगह का यह ठेका था वह केंद्र सरकार के स्वामित्व वाला काम था। ऐसे में राज्य स्तर के अधिकारी का हस्तक्षेप भी खटका। इस पर रिश्तेदार ने कागजातों पर संदेह जाहिर किया। इसके बाद ओमवीर ने पुलिस को इत्तला देने में ही समझदारी दिखाई। 

बार संचालक से भी ली है रकम 
आरोपी सुधांशु पांडेय ने राजपुर क्षेत्र के बार संचालक से भी अच्छी खासी रकम ठगी है। बार संचालक से पांडेय आबकारी विभाग का बड़ा अधिकारी बताकर मिला और बार के और भी लाइसेंस दिलाने का झांसा दिया। पांडेय के झांसे में आकर बार संचालक ने तकरीबन एक लाख रुपये भी दे दिए। हालांकि, अभी बार संचालक सामने नहीं आया है। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है। इसके अलावा बिधौली रोड पर त्यागी फार्म के मालिक से भी सुधांशु ने पांच लाख रुपये लिए और उन्हें कई ठेके दिलाने का झांसा दिया। 
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