रूबी चौधरी बुधवार को एलबीएस अकादमी के फर्जी आईएएस प्रकरण का पूरा सच बता सकती है। क्योंकि रिश्वत का पहला दांव एसआईटी की जांच में लगभग नाकाम होने के बाद रूबी खेमे में छटपटाहट है।
अधिवक्ता ने रूबी से दो टूक कहा है कि जो भी सच है, वह कोर्ट को बता दिया जाए, ताकि साजिश में शामिल हर चेहरा बेनकाब हो सके। परिवार के लोगों ने भी रूबी से दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए कहा है।
देहरादून की सुद्दोवाला जेल में बंद रूबी चौधरी के बुधवार को 164 में बयान दर्ज होने हैं। उसके बयान पर हर किसी की निगाह टिकी है। क्या रूबी अपने पहले बयान पर अड़िग रहेगी या अपना जुर्म कबूल करेगी। ..या फिर कोई नया खुलासा करेगी।
इसे लेकर दिनभर गहमागहमी का दौर चलता रहा। एलबीएस अकादमी में रूबी के फर्जी आईएएस के रूप में रहने के तमाम साक्ष्य लगभग एसआईटी जुटा चुकी है।
जबकि लाइब्रेरी में नौकरी दिलाने के नाम पर डिप्टी डायरेक्टर पर पांच लाख रुपए रिश्वत देने के आरोप में अब तक कोई दम नजर नहीं आया है। यही वजह है कि कोर्ट में होने वाले 164 के बयानों में रूबी चौधरी अकादमी में फर्जी आईएएस के पूरे सच से पर्दा उठा सकती है।
164 के बयानों से हाथ लग सकता है सुराग
सूत्रों की माने तो रूबी के सीने में कई ऐसे राज हैं, जो अब तक बाहर नहीं आ पाए हैं। क्योंकि इस खेल में सत्ता के गलियारों के साथ अफसरों के तार कहीं न कहीं जुडे़ हैं। रूबी और उसके अधिवक्ता के बीच मंगलवार को काफी देर तक गुफ्तगू हुई।
सूत्रों का कहना है कि अधिवक्ता ने सब कुछ साफ करने के लिए कहा है। खुद एसआईटी भी मानकर चल रही है कि रूबी के 164 के बयानों में काफी कुछ मिल सकता है, जो विवेचना को नई दिशा दे सकता है। अब देखना यह है कि रूबी चौधरी बुधवार को क्या बयान देती है।
कोर्ट में 164 के तहत रूबी चौधरी द्वारा दिए जा रहे बयानों को विवेचना में शामिल किया जाएगा। जांच में आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई निर्धारित होगी।
- बीएस सिद्धू, पुलिस महानिदेशक
सौरभ का नोटिस गवाह को डराने का प्रयास
आईएएस अकादमी के निलंबित गार्ड देव सिंह को उपनिदेशक सौरभ जैन द्वारा दिया गया मानहानि का नोटिस गवाह को डराने का प्रयास है। यह कहना है कानून के जानकारों का। वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस राघव का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। अभी वह स्टेज नहीं है, जब नोटिस दिया जाए।
सौरभ जैन पर आरोप लगे हैं और उन्हें अभी क्लीन चिट नहीं मिली है। इस तरह का नोटिस अकादमी के उपनिदेशक की गिरफ्तारी की वजह बन सकता है। मामले में सुरक्षा गार्ड देव सिंह गवाह है और कहीं न कहीं यह नोटिस उन्हें डराने का प्रयास है, ताकि वह उनके खिलाफ मुंह न खोले।
अधिवक्ता राघव बताते हैं कि नोटिस से यह माना जा सकता है कि आरोपी अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वह बाहर रहकर इस तरह के नोटिसों से गवाहों को प्रभावित कर सकता है।