अनाज उत्पादन में अव्वल रुद्रपुर जिला अब हत्या जैसे जघन्य अपराध में भी नवंर वन हो गया है। पुलिस हत्याओं पर अंकुश लगाने में नाकाम रही है। नतीजतन जिले में हर छठे दिन हत्या हो रही है।
हालत यह है कि पुलिस एक हत्या का खुलासा कर नहीं पाती कि दूसरी हत्या हो जाती है। आठ महीने में हुई हत्याओं में से छह का पुलिस अब तक खुलासा ही नहीं कर पाई है।
छवि को बट्टा लगा
जमीनी विवाद, रंजिश और लूट के इरादे से हुई हत्याओं से जिले की छवि को बट्टा तो लगा ही है साथ ही कुछ केसों का अब तक खुलासा करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है।
रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप में हुई छात्रा की हत्या और किच्छा में हुई छह वर्षीय मासूम की हत्या भी इसमें शामिल है। आठ माह में हुई हत्याओं पर नजर दौड़ाएं तो अब तक जिले में 40 हत्याएं हो चुकी हैं।
पुलिस आंकड़ों के मुताबिक इनमें जमीनी विवाद, रंजिश समेत अन्य मामलों में हुई 34 हत्याओं का खुलासा तो हो गया है। लेकिन छह मामलों में अभी तक आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इनमें 16 अप्रैल 2013 को ट्रांजिट कैंप वार्ड नंबर दो, ई ब्लाक निवासी सपन डे की 15 वर्षीय पुत्री संध्या की हत्या भी शामिल है।
पुलिस आज तक खुलासा नहीं कर पाई
हत्या के दिन संध्या घर में अकेले थी। इसी बीच संदिग्ध हालात में उसकी जलकर मौत हो गई। पोस्टमार्टम में गला घोंटकर उसकी मौत होने की पुष्टि हुई।
20 मई को किच्छा थाना के ग्राम अजीतपुर निवासी सीताराम की नातिन रश्मि (6) को किसी ने अगवा कर लिया था। अगले दिन उनका शव गांव के ही पास श्मशान घाट पर मिला। इसका भी पुलिस आज तक खुलासा नहीं कर पाई है।
इस वर्ष अब तक सबसे अधिक हत्याएं
पुलिस आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष जनवरी से 30 अगस्त तक सबसे अधिक 40 हत्याएं हुई हैं। यह आंकड़े पिछले दो वर्षों के आंकड़ों से कहीं अधिक है। वर्ष 2012 के शुरूआती आठ माह के भीतर जिले में 31 और वर्ष 2011 में 21 हत्याएं हुई थीं।