दून पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने 25 अप्रैल को दिल्ली युनिवर्सिटी के ग्रेजुएट कमल सिंह और इंजीनियर विजय कुमार को गिरफ्तार किया था। दोनों का एक तीसरा साथी एसएस अलघ भी है, जो पुलिस की पकड़ में नहीं आ सका है। आरोप है कि इन्होंने अपनी वेबसाइट www.bits2btc.com के माध्यम से फर्जी तरीके से आभासी मुद्रा इथेरियम और बिटकॉइन बेच रहे थे।
इस तरह उन्होंने लोगों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की। ठगी के इस पैसे को वे देहरादून व अन्य शहरों में विभिन्न माध्यमों से निवेश कर रहे थे। इनसे पूछताछ में पता चला है कि ये आभासी मुद्रा के साथ-साथ फिजिकल करेंसी भी तैयार कर उसे गोल्ड मार्केट में बेचते हैं। इसके लिए उन्होंने देहरादून में एक यूनिट लगाई है।
इस जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस गुरुवार रात को कमल और विजय को लेकर आईटी पार्क पहुंची थी। यहां उन्होंने लगभग 4000 वर्गफीट के एक कांप्लेक्स में छापा मारा और वहां से जरूरी सामान को कब्जे में लेकर कांप्लेक्स को सील कर दिया। दिल्ली पुलिस ने यहां से 500 ग्राफिक्स कार्ड, आठ कंप्यूटर व सर्वर और 100 इथेरियम रिग्स बरामद की हैं।
क्या होता है इथेरियम
इथेरियम को ईथर भी कहा जाता है। इसे साल 2013 में बिटकॉइन प्रोग्रामर विटालिक बटेरिन ने तैयार किया था। यह बिटकॉइन के बाद सबसे महंगी आभासी मुद्रा है। इसका वर्तमान मूल्य लगभग 500 डॉलर है और बाजार करीब 4600 करोड़ डॉलर का है। यह इथेरियम ब्लॉकचेन टेकभनोलॉजी पर काम करती है। साल 2015 के बाद से अब तक इसके बाजार में 6800 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। बिटकॉइन का मूल्य लगभग 9 हजार डॉलर प्रति कॉइन है।
2017 में लिया था किरा/ह्य पर कांप्लेक्स
आरोपियों ने यह कांप्लेक्स मार्च 2017 में किराए पर लिया था। यहां उन्होंने आठ लोगों को काम पर भी रखा हुआ था जो कि उनके लिए इथेरियम कॉइन छापने का काम करते थे। इसके अलावा एक शख्स मशीनों और कंप्यूटर की रखरखाव के लिए भी जॉब पर रखा हुआ था।
दून यूनिट से करेंसी बेचकर की 70 लाख की कमाई
इस यूनिट के बारे में पड़ोसियों को गुमराह किया गया था। उन्हें बताया गया था कि यह एक बड़ी कंपनी का सर्वर रूम है। दिल्ली पुलिस को जानकारी मिली है कि इस यूनिट के माध्यम से करेंसी बेचकर उन्होंने एक साल में करीब 70 लाख रुपये की कमाई की है। --
तीनों पार्टनरों के झगड़े में खुला मामला
आभासी मुद्रा के इस गोरखधंधे में तीनों पार्टनर काफी समय से काम कर रहे थे। इसी बीच इनका तीसरा साथी एसएस अलघ पूरे धंधे पर अपना होल्ड चाहता था। इसी के चक्कर में उसने अपने साथियों की शिकायत पुलिस को कर दी। फिर क्या था दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने इस धंधे की ही परत पर परत खोलती चली गई।
अपनी मुद्रा भी चलाई हुई हैं
आरोपी इस धंधे में इतने माहिर हो गए हैं कि उन्होंने अपनी अलग से मुद्रा भी लॉन्च कर दी है। इन मुद्राओं के नाम उन्होंने hbx और mcap रखा हुआ है। आरोप है कि ये तीनों इन मुद्राओं को बेचकर भी ठगी कर रहे हैं।