देहरादून नारी निकेतन में संवासिनी के गर्भपात और भ्रूण को इधर-उधर करने के राज का खुलासा होना अभी बाकी है।
मसलन, गर्भपात कराने में कौन-कौन शामिल था? किसके इशारे पर नारी निकेतन से भ्रूण को निकालकर दूधली गांव के जंगल में छिपाया गया? जिस कर्मचारी की निशानदेही पर भ्रूण बरामद हुआ, वह पुलिस की गिरफ्त में तो है, लेकिन वह कुछ भी नहीं बोल रहा है। बताया जा रहा है कि आरोपी एक अन्य साथी के साथ जंगल तक स्कूटर से गया था।
नारी निकेतन में संवासिनी के शारीरिक शोषण और उसके गर्भपात मामले में बहुत कुछ साफ होना शेष है। अभी सिर्फ वही आरोपी सलाखों के पीछे गए हैं, जिन्होंने संवासिनी को अलग-अलग समय पर हवस का शिकार बनाया। गर्भपात कराने से लेकर भ्रूण को छिपाने तक के किरदारों के चेहरों से नकाब उठना बाकी है।
15 नवंबर की रात दवा देकर संवासिनी का गर्भपात कराने के बाद भ्रूण को नारी निकेतन के परिसर में दबा दिया गया था। 17 नवंबर को मामला अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद भ्रूण को नारी निकेतन से निकाल कर दूधली के जंगल में दबा दिया गया।
बताया जा रहा है कि भ्रूण को जंगल में दबाने के लिए नारी निकेतन का एक कर्मचारी अपने परिचित के साथ स्कूटर से गया था। पुलिस ने उसी की निशानदेही पर भ्रूण बरामद किया है। लेकिन आरोपी ने किसके इशारे पर यह काम किया इसका खुलासा नहीं हो पाया है।
उसका साथी स्कूटर से उसके साथ दूधली जाने की बात तो स्वीकार कर रहा है, लेकिन भ्रूण के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है। आरोपी अपने साथी को बाहर छोड़कर अकेला जंगल के अंदर गया था।
नारी निकेतन मामले में हर आशंका को दूर करने वाली कार्रवाई की जाएगी। गर्भपात और भ्रूण को लेकर भी जल्द ही तस्वीर साफ हो जाएगी। इस खेल में जो भी शामिल रहा है, उसके खिलाफ निश्चित तौर पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. सदानंद दाते, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक