राजधानी देहरादून में एक परिवार के संपत्ति विवाद में जिलाधिकारी दून और अपर तहसीलदार समेत चार लोगों पर अभिलेखों में हेराफेरी और पत्रावली गायब करने का मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस ने सीजेएम कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज किया है। केस दर्ज होने के बाद पुलिस और प्रशासन में हड़कंप है। डीएम बीवीआरसी पुरुषोत्तम का कहना है कि बिना शासन की अनुमति के उनके विरुद्ध केस दर्ज नहीं किया जा सकता।
वहीं एसएसपी अजय रौतेला को पहले तो कोई जानकारी नहीं थी, बाद में वह कोर्ट के आदेश का हवाला देकर मामला संभालते नजर आए।
पूरा घटनाक्रम
दून कोतवाली में दर्ज मुकदमे में जमनीवाला के धर्मेंद्र शर्मा ने अपने भाइयों चमनलाल शर्मा निवासी राजा रोड और गजेंद्र प्रसाद निवासी गुनियाल गांव के साथ कलेक्टर दून और अपर तहसीलदार शुजाउद्दीन को आरोपी बनाया है।
दरअसल, तीन भाइयों में पैतृक संपत्ति का बंटवारा तो हुआ, लेकिन इससे धर्मेंद्र और उनकी मां संतुष्ट नहीं थी। मां का निधन होते ही चमन और गजेंद्र ने अपने हिस्से की संपत्ति का दाखिल खारिज करा लिया।
धर्मेंद्र ने इस पर आपत्ति जताते हुए जुलाई 2013 में अपर तहसीलदार शुजाउद्दीन की कोर्ट में अपील की। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अपर तहसीलदार ने गजेंद्र और चमन के पक्ष में आदेश जारी कर दिया।
पत्रावलियां कार्यालय से गायब
धर्मेंद्र ने इस फैसले को एसडीएम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन इसी बीच मामले से जुड़ी पत्रावलियां अपर तहसीलदार के कार्यालय से गायब हो गईं। धर्मेंद्र ने जिलाधिकारी से शिकायत की तो उन्होंने मामले की रिपोर्ट तलब की, मगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की।
इसके बाद धर्मेंद्र ने अदालत की शरण ली। आरोप लगाया कि चमनलाल शर्मा और गजेंद्र प्रसाद ने प्रशासनिक अधिकारियों से सांठगांठ कर साजिशन अभिलेखों से छेड़छाड़ की और पत्रावलियां गायब करा दीं। इस वजह से वह मामले की ऊपरी कोर्ट में अपील नहीं कर सका।
धर्मेंद्र ने दोनों भाइयों समेत डीएम और तहसीलदार को भी आरोपी बनाया है। अदालत के आदेश पर पुलिस ने धारा 466, 467, 468 और 120 बी के तहत रिपोर्ट दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
करोड़ों की है प्रापर्टी
जमनीवाला में इन भाइयों की पैतृक संपत्ति में बीस बीघा जमीन और एक मकान है। बंटवारे पर वर्ष 2008 से विवाद चल रहा है। संपत्ति की कीमत करोड़ों की बताई जा रही है। बंटवारे पर सहमति न बनने से तीनों भाई मुकदमेबाजी में फंस गए।