मामले में स्कूल की निदेशक समेत प्रबंधन के पांच सदस्यों को इसमें आरोपी बनाया गया। पुलिस ने चारों छात्रों के खिलाफ गैंगरेप व पॉक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था, जबकि प्रबंधन के पांचों लोगों को साक्ष्य छुपाने और आपराधिक षड्यंत्र का आरोपी माना गया।
हालांकि पांचों आरोपियों पर लगे इन आरोपों पर स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने पुलिस से आरोपों को पुष्ट करने के साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा था। इसके बाद पुलिस को छात्रा की मेडिकल रिपोर्ट मिली, जिसमें पुष्टि हुई कि उसका गर्भपात भी कराया गया है। इस आधार पर एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने मुकदमे में धाराएं बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ जबरन गर्भपात कराने (आईपीसी की धारा 313) और आरोपियों को छुपाने (आईपीसी धारा 212) जोड़ दी। इन दोनों धाराओं को शनिवार को न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था।
इसके बाद मामले में पिछले दिनों गठित की गई एसआईटी ने रविवार को बोर्डिंग स्कूल का मुआयना किया। वहां कुछ कर्मचारियों और शिक्षकों के बयान भी दर्ज किए गए। पुलिस के अनुसार बोर्डिंग स्कूल से पुलिस को कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि इन साक्ष्यों को आरोपियों की जमानत के विरोध में न्यायालय में पेश किया जाएगा।