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हत्या की देवर ने और दोष मढ़ा केदारनाथ आपदा पर

Thu, 12 Jun 2014 03:12 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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पिछले वर्ष केदारघाटी की आपदा में बड़ी संख्या में लोग मौत के मुंह में चले गए थे। बच्चे अनाथ हुए, भरे-पूरे परिवार तबाह हो गए।
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आपदा पीड़ितों के परिजनों को ता-उम्र ये जख्म सालते रहेंगे लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने सिर्फ अनुग्रह राशि हथियाने या फिर अपना जुर्म छिपाने के लिए आपदा का सहारा लिया।

उत्तराखंड पुलिस ने मौके पर जाकर छानबीन की तो धोखाधड़ी सामने आ गई। इस तरह के कई मामले अब भी सामने आ रहे हैं।

गुमशुदगी की झूठी रिपोर्ट

एक मामला मेरठ से जुड़ा है। रीना की हत्या उसके देवर समरपाल ने की थी।

यह मामला मेरठ की मवाना कोतवाली में भी दर्ज है। लेकिन उसके भाई अनुज ने गुमशुदगी की झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी। कहा गया कि उसकी बहन केदारनाथ यात्रा पर गई थी।

सब इंस्पेक्टर विद्यादत्त जोशी ने जब विवेचना की तो मामला खुला। विवेचना में कहा गया कि यह रिपोर्ट अनुज ने समरपाल के बहकावे में आकर लिखाई थी।

केदारनाथ जाने की बात पाई गई गलत

रामनगर, रुड़की के संत मलिक ने अपनी पत्नी ऊषा, पुत्र गुरदीप, पुत्री शालू की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी।

बताया कि आपदा के दौरान ये लोग केदारनाथ गए हुए थे। सब इंस्पेक्टर अरुण त्यागी ने विवेचना की तो इन लोगों के केदारनाथ धाम जाने की तस्दीक नहीं हुई।

पता भी गलत निकला। माजरी माफी के हरि सिंह ने अपने पिता चमनलाल की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन विवेचना में चमनलाल के केदारनाथ जाने की बात गलत पाई गई।

सिर्फ अनुग्रह राशि के लिए लिखाई रिपोर्ट

जिला अजमेर के गांव साम्प्रौदा के मंगल ने रामकरण मेघवंशी की केदारनाथ में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

सब इंस्पेक्टर हरि सिंह नेगी वहां गए और तो पता चला कि रामकरण की मौत गांव में ही हुई थी। सारा गांव इस बात को जानता था। सिर्फ अनुग्रह राशि के लिए यह रिपोर्ट लिखाई गई थी।

मध्यप्रदेश के दमोह के शंकर ने उत्तमचंद्र की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में पता चला कि उत्तम की मौत छह साल पहले हो चुकी है।
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आपदा के नाम पर फायदा लेना चाहा

देवास के सुनील पटेल ने महेंद्र पटेल की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। विवेचना में पता चला कि जमीन के विवाद के चक्कर में महेंद्र पहले से ही फरार चल रहा है।

उसके केदारनाथ आने की भी तस्दीक नहीं हुई। इसी तरह कई और मामले हैं जिनमें अनुग्रह राशि पाने और जुर्म से बचने के लिए लोगों ने आपदा के नाम पर फायदा लेना चाहा।

अभिहित अधिकारी एनएस डांगी ने बताया कि उत्तराखंड पुलिस ने मौके पर जाकर जांच की तो धोखाधड़ी उजागर हुई।
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