रूद्रप्रयाग जिला एवं सत्र न्यायालय ने पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप में पति को पांच साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी को हिरासत में लेकर वारंट तैयार कर जेल भेजने के आदेश दिए हैं।
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ग्राम बरसीर (जखोली) के वीरेंद्र लाल का विवाह वर्ष 2006 में डांगी भगोड़ा गांव निवासी फूलदेई पुत्री वृंदावन के साथ हुआ था। वीरेंद्र लाल मुंबई में नौकरी करता था, जब भी वह घर आता तो पत्नी के चरित्र पर शक करता था।
पत्नी ने की थी आत्महत्या
पति के उत्पीड़न से तंग आकर फूलदेई ने पांच सितंबर 2012 को लस्तर नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर दी। फूलदेई के पिता वृंदावन ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
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पुलिस ने आईपीसी की धारा 306 और 498 ए के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। घटना के समय फूलदेई गर्भवती थी।
इन धाराओं में हुई सजा
जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष नैथानी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में वीरेंद्र को धारा 306 के तहत पांच साल के कठोर कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड एवं धारा 498 (ए) में दो साल की सजा और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। सरकार की ओर से पैरवी डीजीसी (क्राइम) केपी खन्ना ने की।