एडीजे प्रथम नितिन शर्मा की अदालत ने सिपाही सुरेंद्र सिंह की हत्या के मामले में कातिल राजेंद्र आर्या को आजीवन कारावास की सजा से दंडित कर दिया। अदालत ने इस मामले में दस हजार का अर्थदंड भी लगाया है। सिपाही एसपी विमला गुंज्याल का भाई था।
एडीजीसी नवीन चंद्र जोशी के अनुसार छह मई 2014 को अमित चंद्र जोशी की स्कूटी बेस अस्पताल परिसर से चोरी हो गई थी। इस मामले में उन्होंने पुलिस को सूचना दी। 27 मई को लालडांठ पर अमित ने अपनी स्कूटी को कुसुमखेड़ा निवासी राजेंद्र आर्या को चलाते हुए देख लिया था।
उन्होंने आरोपी को पकड़कर मुखानी चौकी पुलिस के हवाले कर दिया। अभियुक्त ने बताया कि स्कूटी असलम ने चुराई थी। ढूंढने के बावजूद असलम का पता नहीं चल सका। पुलिस ने रात में अभियुक्त राजेंद्र आर्या की गिरफ्तारी होने पर उसे चौकी में रखा।
चौकी की निगरानी की जिम्मेदारी सिपाही सुरेंद्र सिंह की थी। देर रात अभियुक्त ने सिपाही के सीने पर नुकीली सरिया से वार कर दिया और मौके से भाग निकला। चौकी के पुलिसकर्मी घायल सिपाही को लेकर साईं अस्पताल गए लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस मामले में तत्कालीन चौकी प्रभारी ललित मोहन जोशी ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। चौकी प्रभारी ने घटना के बाबत रिपोर्ट दर्ज कराई। हत्या की जानकारी मिलने पर भाई के शव को देखने के लिए एसपी विमला गुंज्याल भी आई थीं। एडीजीसी ने साक्ष्यों के समर्थन में 15 गवाहों को पेश किया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अभियुक्त राजेंद्र आर्या को दोषी ठहराया। अदालत ने धारा 302 के तहत कातिल को आजीवन कारावास की सजा के साथ दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। भागने के मामले में भी अदालत ने दो साल की सजा सुनाई है।