बल्लीवाला फ्लाईओवर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी माना कि फ्लाईओवर का चौड़ीकरण ही हादसों पर अंकुश का समाधान है। लेकिन, बड़ी बात यह है कि हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष ही इस फ्लाईओवर को चौड़ा करने के आदेश दिए थे। इस पर विभाग ने 120 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था। लेकिन, वित्तीय संकट का हवाला देते हुए शासन ने प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी थी। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि यदि शासन पहले ही बजट जारी कर फ्लाईओवर को चौड़ा कर देता तो शायद अब तक हादसों पर अंकुश लग चुका होता।
मालूम हो कि फ्लाईओवर पर बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए पिछले वर्ष मार्च में हाईकोर्ट ने इस फ्लाईओवर को चौड़ा करने के आदेश दिए थे। उसके बाद टेक्निकल कंसलटेंसी सर्विसेज को कंसलटेंट नियुक्त किया था। उसने अपनी रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग और राजमार्ग यूनिट को भी दी थी। इसमें उसने फ्लाईओवर को बल्लूपुर से जीएमएस रोड की ओर चौड़ा करने का सुझाव दिया था।
इसको लेकर मई-जून में करीब 120 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था। लेकिन, बजट जारी न होने के चलते चौड़ीकरण का कार्य शुरू नहीं हो पाया। कंसलटेंट ने फिजिबिलिटी स्टडी के बाद रिपोर्ट सौंपी थी। उसके बाद 120 करोड़ रुपये से फ्लाईओवर को चौड़ा किया जाना था। लेकिन, बजट के अभाव में यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।