राज्य बाल संरक्षण आयोग के निर्देश पर बच्चों से भीख मंगाने वाले छह अभिभावकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। हरिद्वार में टास्क फोर्स की ओर से की गई यह कार्रवाई प्रदेश में अपनी तरह की पहली कार्रवाई है।
हरिद्वार की अल साबरी सोसाइटी ने अक्तूबर 2013 में आयोग को हरिद्वार में बच्चों से भिक्षावृत्ति कराने की शिकायत की थी।
दो बार रिमांइडर के बाद जागी डीएम
आयोग के अध्यक्ष अजय सेतिया ने हरिद्वार जिलाधिकारी डा. निधि पांडेय को दस दिन में कार्रवाई का निर्देश दिया, लेकिन दो बार रिमाइंडर भेजने के बाद डीएम हरकत में आईं।
29 नवंबर 2013 को आयोग को भेजे पत्र में डीएम ने बताया कि शिकायत सही है, लेकिन मामले में बाल श्रम अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती, क्योंकि बच्चों का कोई नियोक्ता नहीं है। उनके अभिभावक ही उनसे भीख मंगवाते हैं। डीएम के पत्र के बाद पुलिस और श्रम विभाग ने कदम खींच लिए।
आयोग की सख्ती पर केस दर्ज
इस पर सेतिया ने सख्ती दिखाते हुए फिर डीएम को पत्र भेज टास्क फोर्स के माध्यम से कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बावजूद कदम न उठाने पर आयोग ने पत्र भेज दस अप्रैल 2014 को डीएम को तलब किया।
पत्र मिलते ही डीएम ने दो अप्रैल को टास्क फोर्स की बैठक बुलाई और आठ अप्रैल को बचाव दल ने हरिद्वार के विभिन्न स्थानों पर छापा मारा। इस दौरान छह बच्चे और उनके माता-पिता भीख मांगते पाए गए।
सभी अभिभावकों पर किशोर न्याय अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, लेकिन बच्चे अभिभावकों के पास ही रहेंगे।
यह है टास्क फोर्स
जून 2013 में मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने जिले में टास्क फोर्स गठित करने का निर्देश दिया था।
फोर्स का कार्य बाल मजदूरों को मुक्त कराना, उनका पुनर्वास करना और उनसे काम कराने वालों पर मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई करना है।