फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हत्यारे आशिक को फांसी, युवती समेत दो का काट दिया था गला

Sat, 05 Sep 2015 11:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
पांच साल पहले देहरादून के विकासनगर क्षेत्र स्थित सेलाकुई में हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में कोर्ट ने दोषी युवक को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस वारदात को ‘रेयर आफ रेयरेस्ट’ माना है। फैसला सुनाए जाने के बाद दोषी को जेल भेज दिया गया। इस मामले में चार चश्मदीदों की गवाही अहम रही। जबकि कुल 22 गवाह पेश किए गए।
विज्ञापन


बीती 10 फरवरी 2011 को एकतरफा प्रेम में पागल शहजाद अली पुत्र अनवर निवासी केदारावाला ने शराब के नशे में सेलाकुई बाजार स्थित बाइक वर्कशाप के मालिक संजय गुलेरिया और उसके यहां रिसेप्शन पर काम करने वाली युवती ललिता पुत्री रंजीत सिंह निवासी देवथला, रुद्रपुर की सरेआम गला काटकर हत्या कर दी थी।

वारदात के बाद शहजाद ने वर्कशाप में पेट्रोल छिड़ककर कर आग लगा दी और सर्विस के लिए आई एक बाइक लेकर फरार हो गया।

उसी रात पुलिस ने युवक को सेलाकुई पुल के नीचे से छुरा और बाइक समेत गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में पुलिस ने संजय गुलेरिया के चचेरे भाई अनिल कुमार पुत्र बीरबल निवासी गोकुलवाला की तहरीर पर हत्या, लूट, आगजनी और आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज किया था।
विज्ञापन

साढ़े चार साल तक चली मुकदमे की सुनवाई

(तस्वीर- सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट से बाहर आता शहजाद)

करीब साढ़े चार साल तक इस मामले की सुनवाई चली। अदालत ने सभी धाराओं में आरोपी को दोषी पाया। सरकारी अधिवक्ता गुरुप्रसाद रतूड़ी ने बताया कि कोर्ट ने हत्याकांड को नृशंस और रेयर ऑफ द रेयरेस्ट माना है।

शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला सत्र न्यायाधीश विकासनगर मोहम्मद सुल्तान ने फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट में कुल चार चश्मदीदों के अलावा 22 गवाह पेश किए गए। मामले की विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष प्रवीन कोश्यारी ने की थी।

बताया न्याय की जीत
इस फैसले को लेकर सुबह से ही कोर्ट में खासी गहमागहमी थी। अभियोजन पक्ष के लोग जहां एडीजे अदालत के बाहर फैसले के इंतजार में बैठे थे। वहीं बचाव पक्ष के लोग हवालात के बाहर दिखाई दिए। फैसला आने के बाद जहां अभियोजन पक्ष ने इसे न्याय की जीत करार दिया, वहीं बचाव पक्ष में मायूसी छा गई।
विज्ञापन

आज मिली बेटे की आत्मा को शांति

(सजा सुनाए जाने का इंतजार करते मृतक संजय के प‌िता और पर‌िजन)

कोर्ट में जज ने शहजाद को फांसी की सजा सुनाई तो संजय के पिता गुलाब सिंह की आंखे भर आई, गला रौंध गया। मुंह पर बस यही अल्फाज थे आज बेटे की आत्मा को शांति मिल गई...बेटे के गम में जो पत्नी साथ छोड़ गई थी आज उसकी आत्मा भी न्याय मिलने से खुश होगी।

घर के इकलौते चिराग संजय गुलेरिया के गम में मां की भी वारदात के चंद दिन बाद ही हॉर्ट अटैक से मौत हो गई थी। जिसके बाद से संजय की पत्नी और उसके बेटा और बेटी की जिम्मेदारी भी गुलाब सिंह के कंधों पर आ गई। बुढ़ापे में वह कोर्ट में मामले में होने वाली सुनवाई में भी जाते और खेतीबाड़ी कर परिवार का पेट भी पालते।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें