मई माह में भागलपुर, बिहार के ग्रामीण बैंक में करीब 50 लाख रुपए लूटने वाला एक बदमाश देहरादून के सेलाकुई में पकड़ा गया। बिहार और सहसपुर थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में शनिवार को उसे गिरफ्तार किया गया।
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कन्हैया गैंग के शातिर अपराधी ने खुलासा किया कि गैंग की योजना अब पटना में रेलवे स्टेशन के पास एक ऑफिस से सात करोड़ रुपए लूटने की थी। इन डकैतों पर 50 हजार रुपए के इनाम का प्रस्ताव विचाराधीन है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पुष्पक ज्योति ने बताया कि बिहार के ललमठिया थानाध्यक्ष रोहित कुमार ने देहरादून आकर सूचना दी कि 50 लाख रुपए की बैंक डकैती डालने वाला जंगली साव सहसपुर थाना क्षेत्र में छिपा है। एसओ सहसपुर यशपाल सिंह और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई।
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पुलिस ने आरोपी जंगली साव निवासी पीपरपाती बिहार को शनिवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। जंगली साव ने 26 मई को अपने साथियों के साथ मिलकर दिन-दहाड़े डकैती डाली थी। आरोपी लूटपाट के बाद बैंक परिसर में देसी बम छोड़ आया था।
फिलहाल उस पर पांच हजार रुपए का इनाम है, लेकिन बिहार शासन में 50 हजार रुपए का इनाम घोषित करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि अब उसका गिरोह पटना में हवाला के तहत आने वाले 7 करोड़ रुपए लूटने का प्लान बना रहा था।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक ऑफिस में हवाला के जरिए कालेधन का कारोबार होता है। जहां हर समय 7 से लेकर 8 करोड़ तक की रकम रहती हैं। कप्तान के मुताबिक, लूट का मास्टर माइंड पांच अन्य साथियों के साथ फरार है।
उसके खिलाफ बैंक से 22 लाख रुपए लूटने के अलावा कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस दौरान एसपी सिटी अजय सिंह, एसपी देहात जीसी ध्यानी और सीओ विकासनगर एसके सिंह इस दौरान मौजूद रहे।
पुलिस को इनाम
एसएसपी ने टीम में शामिल एसओ यशपाल सिंह, ललमठिया (बिहार) के एसओ रोहित कुमार, सेलाकुई चौकी प्रभारी दिलबर नेगी, कांस्टेबल रविंद्र और सुजैत कुमार को पुरस्कृत करने की घोषणा की।
जुर्म कम, फर्जी मुकदमे ज्यादा आरोपी जंगली साव ने बड़ी बेबाकी से अपने जुर्म की कहानी सुनाई। 2006 में पहली बार चोरी के एक मामले में उसका नाम पुलिस रिकार्ड में आया था। साव की मानें तो इसके बाद पुलिस ने तीन घटनाएं जबरदस्ती उसके मत्थे मढ़ दी।
22 लाख बैंक लूट में उसका हाथ नहीं था। मुकदमों की पैरोकारी में मोटी रकम खर्च होने के कारण वह कई लाख रुपए का कर्जदार हो गया था। इसलिए उसके द्वारा अपने साथियों के साथ बैंक लूट की घटना को अंजाम दिया गया।
ढाई लाख रुपए रिश्वत में दिए आरोपी जंगली को लूट के करीब पौने पांच लाख रुपए मिले थे, इनमें से ढाई लाख रुपए दोस्त की सरकारी नौकरी के लिए रिश्वत में दे दिए। बाकी रकम उधार चुकता करने में खर्च कर दी।
उसका कहना था कि सेलाकुई में आकर वह आम बेच चुका है, इसलिए उसे पूरे इलाके की जानकारी थी। जंगली का कहना था कि रुपये मंगाने की वजह से वह पुलिस नजरों में आया है।
भागलपुर बैंक डकैती के आरोपी जंगली साव को यह इल्म नहीं रहा होगा कि अपने परिचित के जरिए बैंक एकाउंट में रकम ट्रांसफर कराने में वह कानून की गिरफ्त में आ जाएगा, क्योंकि वह बिहार से फरारी के तमाम रास्ते बंद कर यहां तक पहुंचा था।
पुलिस को दरवाजे पर देखकर आरोपी को झटका जरूर लगा, लेकिन बिहार और झारखंड के नक्सली एरिया में सक्रिय कन्हैया गैंग के इस शातिर का अंदाज बेहद खौफनाक भरा है। बिहार के इस अपराधी का सेलाकुंई से पुराना जुड़ाव रहा है। यही वजह थी कि भागलपुर की 50 लाख रुपए की बैक डकैती की वारदात को अंजाम देने के बाद वह सीधा यहां चला आया।
कमरा किराए पर लेकर वह अपनी पहचान छिपाए था। खुद को आरोपी ने बॉबी के रूप में प्रचारित कर दिया था। जंगली साव 20 हजार रुपए लेकर यहां आया था। यह रकम खर्च हुई तो आरोपी ने अपने एक दोस्त के माध्यम से बैंक खाते में 50 हजार रुपए ट्रांसफर कराए।
पहले से ही भागलपुर पुलिस डकैती में शामिल रहे बदमाशों के करीबियों पर नजर गड़ाए थी। रकम ट्रांसफर के जरिए भागलपुर पुलिस उसकी तलाश में दून तक पहुंच गई। बिहार और सहसपुर पुलिस की माथापच्ची के बाद उस खाते के मालिक तक पहुंच गई, जिसमें रकम ट्रांसफर हुई थी।
खातेदार खुद ही रकम लेकर सेलाकुई में जंगली साव के घर तक पहुंचा था। इस कारण पुलिस को जंगली साव के जमनीपुर सेलाकुई के ठिकाने तक पहुंचने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई।
विस्फोटकों के सहारे डकैती को अंजाम कन्हैया गैंग के सभी सात बदमाश ग्रामीण बैंक में डकैती के दौरान हाथों में विस्फोटक लिए हुए थे। उन्होंने बैंक को उड़ाने की धमकी दी। हालांकि उन्होंने विस्फोटकों का इस्तेमाल नहीं किया। तमंचे के बल पर ही उन्होंने डकैती की वारदात को अंजाम दिया।
डकैती के बाद जंगली साव का साथी विक्की यादव भी सेलाकुई आया था, लेकिन कुछ दिन बाद लौट गया। इसके बाद बिहार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। जंगली साव की गिरफ्तारी के बाद अब भी गैंग के पांच बदमाश पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। बताया जाता है कि ये बदमाश मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करते, जिस कारण इन्हें ट्रेस करना मुश्किल होता है।