देहरादून पुलिस की कस्टडी से फरारी के बाद देश का नं. वन बदमाश भूरा पुलिस से बचने के लिए एक आश्रम में 'संत' के रूप में रह रहा था।
15 दिसंबर 2014 को दून पुलिस की अभिरक्षा से बागपत से भागने के बाद
भूरा ने अपना गेटअप तो ज्यादा नहीं बदला था, लेकिन हर ठिकाने पर नाम बदलता
रहा। चंडीगढ़ में किराये का मकान लेने के साथ भूरा और उसके साथी सचिन खोखर
ने भगवा चोला पहन एक बाबा के आश्रम को भी शरणस्थली बनाया था।
देहरादून पुलिस की कस्टडी से फरारी के बाद कुख्यात भूरा फर्जी आईडी पर हरियाणा, पंजाब में अलग-अलग जगहों पर ठिकाने बनाकर रह रहा था।
पटियाला में शनिवार को हुई गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने भूरा और उसके साथी सचिन खोखर से सात फर्जी आईडी प्रूफ बरामद किए हैं, जिनमें आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी हैं। बताया जा रहा है कि भूरा थाईलैंड भागने की फिराक में था।
दोनों ने सोनीपत, कैथल, चंडीगढ़ और नाभा आदि में शरण लेने की बात स्वीकार की है। पुलिस मान रही है कि कुछ ठिकाने ऐसे हैं, जो भूरा अभी छिपा रहा है। दून के पुलिस उपाधीक्षक मनोज कत्याल की अगुवाई में एसटीएफ की टीम शनिवार देर रात ही पटियाला पहुंच गई थी, जहां पर भूरा और सचिन से पूछताछ की गई।
सूत्रों की मानें तो भूरा कभी एक ठिकाने पर ज्यादा दिन तक नहीं ठहरा। सूत्रों के मुताबिक 15 मार्च के बाद भूरा चंडीगढ़ आ गया था। बाद में जीरकपुर में कमरा किराये पर लिया था। यहां रहते हुए भूरा और सचिन ने एक बाबा के आश्रम का भी इस्तेमाल किया। भगवा टी शर्ट पहनकर यह दोनों बाबा के अनुयायी बने रहे।
दोनों कुछ दिन किराये के कमरे तो कुछ दिन बाबा के आश्रम में रहते थे। इसी बीच इश्क मिजाजी ने उन्हें कानून की गिरफ्त में पहुंचा दिया। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि दिल्ली का एक लाख का इनामी नीरज बवाना भी क्या उनके साथ रहा है।