दस लाख के इनामी अमित मलिक उर्फ भूरा की तलाश में लगी पुलिस टीम भागते अब थकने लगी हैं।
मोस्ट वांटेड का कोई सुराग नहीं
20 दिन की मशक्कत के बाद भी मोस्ट वांटेड का कोई सुराग नहीं मिलने के कारण कई अधिकारी तो इस कदर निराश हो चुके हैं कि ऑपरेशन भूरा को बीच में छोड़ देना चाहते हैं। इन्हें यकीन ही नहीं है कि भूरा को जल्द ही पकड़ा जा सकता है।
एक और वजह यह है कि पुलिस शुरू से ही भूरा को पकड़ने से ज्यादा दिलचस्पी असलाह की बरामदगी में ले रही थी।
अब यूपी और उत्तराखंड पुलिस के पास जानकारी है कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जैसे तैसे हथियार बरामद कर लिए हैं।
पुलिस सूत्रों ने बताया इसके बाद उत्तराखंड पुलिस ऑपरेशन भूरा में खास दिलचस्पी नहीं ले रही है। यूपी पुलिस पहले से ही अलग थलग पड़ी है। न तो उत्तराखंड पुलिस कोई जानकारी यूपी पुलिस को दे रही है और न ही दिल्ली की पुलिस। दिल्ली में भूरा के साथी की गिरफ्तारी की जानकारी तब दी गई, जब पूछताछ के बाद लिखा-पढ़ी भी हो गई।
पिछले सात दिन से दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड पुलिस की टीमें अलग अलग दबिश दे रही हैं। विधायक रामवीर शौकीन के घर एक बार तो दिल्ली पुलिस ने यूपी पुलिस के साथ दबिश दी, लेकिन इसके बाद साथ नहीं दिया। यूपी पुलिस को अकेले ही दबिश पड़ी।
बागपत से पहले रोजाना पुलिस की दो टीमें दिल्ली जा रही थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। पुलिस सूत्रों ने कहा यूपी और उत्तराखंड के अधिकारी दिल्ली के चक्कर लगा लगाकर परेशान हो गए हैं। ये लोग चाहते हैं दिल्ली पुलिस भूरा के किसी साथी को पकड़कर हथियारों की बरामदगी दिखा दे और ऑपरेशन बंद कर दिया जाए।
मोनू मिले, तो कुछ बात बने
पुलिस सूत्रों का कहना है कि भूरा के मिलने की उम्मीद तो अभी नजर नहीं आ रही है, लेकिन फिलहाल घेराबंदी उसके साथी सचिन उर्फ मोनू खोखर की हो रही है। भूरा को छुड़ाने की घटना में उसका रोल सबसे अहम रहा था।