अदालत ने पुलिस कस्टडी में लिए गए बंदी की फर्जी सप्लीमेंट्री रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के आरोप में दून अस्पताल के चिकित्सकीय पैनल के तीन डॉक्टरों डॉ. नवजीत बेदी, डॉ. चेतन गिरोटी और डॉ. निधि उनियाल के खिलाफ कोतवाली पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। वहीं, एसओ प्रेमनगर यशपाल सिंह बिष्ट और एसआई जितेंद्र कुमार के खिलाफ भी विभिन्न धाराओं में एक और मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय विनोद कुमार बर्मन ने अपने फैसले में एसएचओ कोतवाली को 24 घंटे के भीतर केस दर्ज कर एफआईआर की प्रति कोर्ट में प्रस्तुत करने के आदेश दिए।
उन्होंने अपने फैसले में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोक प्राधिकारियों एवं कर्मचारियों से कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में अधिक सतर्कता और ईमानदारी बरतने की अपेक्षा की जाती है। प्रत्येक व्यक्ति चाहे वे पुलिस अधिकारी हो या डाक्टर, कोर्ट के सामने सही तथ्य रखने के लिए विधिक रूप से बाध्य हैं। लेकिन इस मामले में पुलिस अफसरों व दून अस्पताल के डॉक्टरों ने कोर्ट के सामने जानबूझकर सही तथ्य नहीं रखे और कोर्ट को गुमराह करने एवं आरोपी पुलिस अधिकारियों को बचाने का पूरा प्रयास किया। इस तरह से यह मामला भारतीय संविधान के प्रावधानों व अन्य वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किए जाने से संबंधित है।