हरिद्वार के एक दंपति ने फर्जी दस्तावेजों पर बैंक ऑफ बड़ौदा से तीन करोड़ रुपए का ऋण लेकर डकार लिया।
जांच में बंधक रखी गई संपत्ति के कागजात फर्जी मिलने के बाद कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। बैंक के तत्कालीन प्रबंधक को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। उधर, आरोपी ने भी जबरन संपत्ति कब्जाने का आरोप लगाते हुए बैंक के पांच अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
कैंट थाने में रिपोर्ट दर्ज
बैंक की बल्लूपुर शाखा के वरिष्ठ प्रबंधक गुरदीप सिंह ने कैंट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि हरिद्वार के न्यू हरिहर कॉलोनी निवासी रेखा कुशवाहा ने पति विजय कुशवाहा के साथ मैसर्स आईटी सर्विसेज एवं ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर 17 अगस्त 2011 को ऋण के लिए आवेदन किया था।
उन्होंने गारंटर बिमलेश निवासी बीएचएल, मुकेश कुमार निवासी शिवालिक नगर की मदद से तीन करोड़ का ऋण प्राप्त कर लिया। ऋण की किश्त न मिलने पर संपत्ति की जांच कराई गई तो संपत्ति के दो विक्रय पत्र बनाने का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।
जांच पड़ताल के बाद बैंक प्रबंधक की तरफ से पिछले साल 26 जून और फिर 15 सितंबर को कैंट थाने में तहरीर दी गई, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। अब कोर्ट के आदेश पर कैंट पुलिस ने कंपनी समेत छह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
इनमें तत्कालीन प्रबंधक आशुतोष मिश्रा भी शामिल हैं। मिश्रा फिलहाल जयपुर की शाखा में मुख्य प्रबंधक के रूप में तैनात हैं। उधर, कोर्ट के आदेश पर विजय कुशवाह की तरफ से बैंक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
विजय कुशवाह का कहना है कि उन्होंने नौ करोड़ की संपत्ति बंधक रखकर सवा पांच करोड़ का ऋण मांगा था, लेकिन तीन करोड़ रुपये ही स्वीकृत हुए। बाद में बिना बताए संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया। वरिष्ठ प्रबंधक शाहिद, सहायक प्रबंधक एसके दुग्गल समेत पांच बैंक कर्मियों को मुकदमे में आरोपित किया गया है।